एंडोस्कोपी कर छोटी आंत में धंसी हेयर पिन को निकाल बचाई जान
- नाक के रास्ते शरीर में घुसी हेयर पिन बन गई मुसीबत, गनीमत रही गले के रास्ते फेफडे़ में नहीं जा पाई पिन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नाक के रास्ते गले से होते हुए पेट और छोटी आंत में जाकर धंसने वाली तीन इंच की हेयर पिन को आखिरकार पीजीआईएमएस के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष ने एंडोस्कोपी के माध्यम से निकाल लिया है। इसके चलते दस वर्षीय दक्ष की जान बच गई और उसे बड़ी सर्जरी से बचा लिया गया। इस मामले में सबसे अधिक डर था कि हेयर पिन कहीं छोटी आंत को नुकसान पहुंचा कर संक्रमण न फैला दे। लेकिन मरीज के लिए धनवंतरी बने डॉ. प्रवीण ने संस्थान के नाम एक ओर रिकार्ड बना दिया है।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय स्थित लाला श्याम लाल अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने शुक्रवार को चिकित्सा क्षेत्र में एक ओर कामयाबी हासिल की है। इसमें डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने पानीपत निवासी दक्ष को नया जीवनदान दिया है। परिजनों ने बताया कि खेल-खेल में हेयर पिन दक्ष के नाक से होते हुए अंदर चली गई। यह पिन गले से होते हुए खाने की नली और पेट से निकलते हुए छोटी आंत में जा कर धंस गई। पेट दर्द की समस्या होने पर जब दक्ष ने घर पर इसकी जानकारी दी तो सभी ने घरेलू उपाय अपनाए, लेकिन मरीज को आराम नहीं हुआ।
जब वह उपचार के लिए पानीपत से रोहतक पीजीआईएमएस आये तो डॉक्टरों ने मरीज के पेट का अल्ट्रासाउंड कराया, इसमें पता चला कि मरीज की छोटी आंत में हेयर पिन धंसी हुई है। वहीं डॉ. प्रवीण ने बताया कि छोटी आंत से हेयर पिन निकालना चैलेंज था कि कहीं वह आंत को फाड़ न दे, इसके साथ ही निकालते समय भी डर था कि कहीं वह कोई अन्य जख्म न कर दे। लेकिन एंडोस्कोपी के माध्यम से इसे आराम से बगैर किसी नुकसान के निकाल लिया गया। अब मरीज बिल्कुल स्वस्थ है। डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि वह विभाग में अभी तक तकरीबन तीस हजार एंडोस्कोपी व क्लोनोस्कोपी बगैर वेटिंग लिस्ट के कर चुके हैं। इससे पहले बैट्री, सिक्के, सुईयां, ब्लेड आदि शरीर से एंडोस्कोपी के माध्यम से निकाल जा चुका है। डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने विभाग की उपलब्धि का श्रेय कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुल सचिव डॉ. एचके अग्रवाल, डीन डॉ. रोहताश यादव व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद को देते हुए कहा है कि प्रशासन के सहयोग से ही आज विभाग में नवीनतम चिकित्सा उपकरण हैं, जिससे मरीजों की जान बचाई जाती है। गौरतलब है कि डॉ. मल्होत्रा ने दो बार चार किलो के बालों के गुच्छा एंडोस्कोपी से निकाल कर विश्व रिकार्ड भी बनाया है।
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मरीज की आंत से निकाली गई हेयर पिन।
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मरीज की छोटी आंत में धंसी हेयर पिन को एंडोस्कोपी से निकालते हुए।
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डॉ. प्रवीण मल्होत्रा।