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ड्रेन नंबर आठ जहर की खेती

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ड्रेन नंबर आठ जहर की खेती
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सिंचाई विभाग ने पब्लिक हेल्थ को थमाया नोटिस व पर्यावरण विभाग को भेजी सूचना

- बगैर ट्रीट किए सीवर का पानी क्यों डाला ड्रेन में
- पब्लिक हेल्थ के साथ पर्यावरण विभाग को भेजी सूचना
- दावा नोटिसों के बाद भी संज्ञान नहीं लेते विभाग के अधिकारी

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
शहर को जहर परोस रही ड्रेन नंबर आठ के अधिकारियों ने मंगलवार को आखिरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पब्लिक हेल्थ को नोटिस जारी कर दिया है। पर्यावरण विभाग को भी इसकी सूचना दे दी है। हालांकि, विभाग के अधिकारी मानते हैं कि वह पहले भी कई नोटिस दे चुके हैं, जिनका कोई असर नहीं हुआ। रही बात पर्यावरण विभाग की कार्रवाई की, तो ड्रेन के आसपास रह रहे अधिकांश किसान स्वयं इस काले कारोबार में शामिल हैं। वह यहां हो रही समस्याओं के खिलाफ आवाज क्यों उठाएंगे।
जहर की खेती मामले में यह तो स्पष्ट है कि पब्लिक हेल्थ विभाग का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहा और बगैर साफ किए सीवर के पानी को ड्रेन में डाला जा रहा है। हैरानी इस बात की भी है कि सिंचाई विभाग को भी इस पर कोई खासा एतराज नहीं है, क्योंकि यहां अधिकारी महज नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं। विभाग के कुछ अधिकारी तो सीवर के पानी से होेने वाली खेती के लाभ तक गिनवाने में पीछे नहीं हटते। बताया जाता है कि सीवर के पानी से उगाई गई सब्जियां अच्छी होती हैं, इससे पैदावार बढ़ जाती है। यह पानी खाद के रूप में अपना असर दिखाता है। इसके चलते नहर के आसपास खेतों के दाम भी बढ़ जाते हैं। यही नहीं अधिकारी दावा भी करते हैं कि इस पानी को जब ऊपर से गिराया जाता है तो यह साफ हो जाता है, कुछ गंद तो फिल्टर में ही साफ हो जाता है। इसके साथ सीवर के पानी की गंदगी जमीन में अपने आप सही हो जाती है, फसल में इसका असर नहीं होता। जबकि स्वास्थ्य विभाग इसे मानव जीवन के लिए जहर बताता है।
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खुले में शौच को न जाएं समझाने में होते हैं अरबों खर्च
विडंबना ही है कि देश में लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए समझाया जाता है और अरबों रुपये विज्ञापनों पर खर्च होते हैं। इसमें बताया जाता है कि खुले में शौच जाने से गंदगी वापस घर में आ जाती है, लेकिन उसी शौच का गंद ड्रेन के माध्यम से खेतों में पहुंचाया जा रहा है। हैरानी तो इस बात की है कि अधिकारी इसे फसलों के लिए लाभकारी भी बताते हैं।

बोले अधिकारी
ड्रेन में बगैर ट्रीटमेंट के सीवरेज का पानी नहीं डाला जा सकता। इस संबंध में पब्लिक हेल्थ विभाग को पहले भी कई नोटिस दिए जा चुके हैं और अब फिर नोटिस जारी किया जा रहा है। इसकी जानकारी पर्यावरण विभाग को भी दी जा रही है। ड्रेन में पीएच की वैल्यू 7.5 से कम या अधिक नहीं होनी चाहिए।
- अनिल सभ्भरवाल, कार्यकारी अभियंता, ड्रेन आठ, सिंचाई विभाग

इस मामले में संबंधित कार्यकारी अभियंता से बातचीत की जा रही है। एसटीपी में क्या समस्या है या कहां से समस्या हो रही है जांच कर रहे हैं। जल्द ही अव्यवस्था को दुरुस्त कराया जाएगा।
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- आईसी जैन, अधीक्षण अभियंता, पब्लिक हेल्थ

सीवर के पानी को ट्रीटमेंट के बाद ही खेती में प्रयोग किया जा सकता है और इसके बाद ही करना चाहिए। क्योंकि सीधा गंदा पानी सब्जियों के लिए हानिकारक है। इससे सब्जियों की गुणवत्ता में असर पड़ता है और यह समस्या पैदा कर सकती हैं।
- सीबी सिंह, पूर्व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी
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