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मानसून सिर पर, बाढ़ बचाव कार्य अधूरे

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मानसून सिर पर, बाढ़ बचाव कार्य अधूरे
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद। प्रदेश में प्री-मानसून की दस्तक हो चुकी है और जिले में अभी तक बाढ़ राहत कार्य अधर में ही लटके पड़े हैं। कहीं पर पत्थर पूरा नहीं हुआ तो कहीं पर पैमाईश नहीं हो पाई है। कहीं पर काम तो शुरू हो गया लेकिन आधा अधूरा ही हुआ है। सिंचाई विभाग की इस लेटलतीफी से बाढ़ प्रभावित की श्रेणी में आने वाले गांवों के लोगों को डर सता रहा है। सोमवार को अंबाला मंडल के आयुक्त विवेक जोशी ने बाढ़ बचाव कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को हर साल में 30 जून तक काम पूरे करने के निर्देश दिए, लेकिन जिस स्पीड से काम हो रहे हैं, उसे देखते हुए तय समय सीमा तक मानकों के अनुसार काम पूरे होने की उम्मीद नहीं है।
प्रदेश सरकार की ओर से जिले में बाढ़ राहत कार्यों के लिए आठ करोड़ का बजट मंजूर किया गया है। इस बार ताजेवाला, हथनीकुंड, मांडेवाला, कोलीवाला, नवाजपुर, लाक्कड, मालीमाजरा और भीलपुरा आदि के लिए बाढ़ राहत के कार्य और बजट मंजूर नहीं हुए। क्षेत्र में केवल चार जगहों भंगेडा, भंगेड़ी, टिब्बी राईयां और शहजादवाला में बाढ़ राहत कार्य के लिए ही एक करोड़ 35 लाख रुपये का बजट आया है। इन गांवों के लिए काफी समय पहले टेंडर जारी कर दिए गए, लेकिन बाढ़ बचाव कार्यों की गति काफी धीमी है। भगेड़ी में अभी पत्थर लगने शुरू हुए हैं। जबकि भंगेड़ा में आधे पत्थर ही लग पाए है। वहीं, शहजादवाला में पत्थरों की पैमाईश का काम पूरा हुआ है। बता दें कि जब तक पत्थर की पैमाईश विभागीय जेई द्वारा नहीं की जाती, तब तक साइट पर पत्थर नहीं लगाया जा सकता। पत्थरों की पैमाईश स्टड बनाकर की जाती है जो कि लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई के हिसाब से मापे जाते हैं। अट्ठारह किलो से कम वजन वाले पत्थर स्टड में नहीं लगाए जा सकते, लेकिन कई बार मजदूर स्टड में बनी जगह को भरने के लिए छोटे पत्थरों का प्रयोग कर लेते हैं।
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बजट न आने से ग्रामीण चिंतित
बाढ़ बचाव कार्यों के लिए बजट न आने से इस बार यमुना किनारे बसे क्षेत्र के लोग दहशत में जीवन बसर कर रहे हैं। गांव माली माजरा, नवाजपुर, लाक्कड ,लेदी, बेलगढ, टापू कमालपुर, होदरी, लापरा, बीबीपुर, खानूवाला, आंबवाली, टिबडियों, काटटरवाली, रणजीतपुर, रामपुरगेंडा, रामपुर बिहटा और कलेसर आदि दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां पर बाढ़ राहत के काम हर साल होते हैं, लेकिन यहां पर इस बार-बार बाढ़ राहत कार्य के लिए बजट नहीं आया।

बाढ़ आने पर बर्बाद होती है हजारों एकड़ फसल
मानसून सीजन से पहले हर साल बाढ़ राहत के कार्य किए जाते हैं और प्रशासन की ओर से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर काम की रूपरेखा तैयार की जाती है। हर साल मानसून सीजन में बाढ़ का पानी कहीं ना कहीं तबाही मचाता है और हजारों एकड़ फसल भी बर्बाद कर देता है। कलेसर, माली माजरा, लाक्कड, भंगेडा, मांडेवाला, बेलगढ, टिबडियों, आंबवाली और लेदी आदि गांवों के खेतों में बाढ़ का पानी काफी नुकसान पहुंचाता है। इन गांवों के लिए इस साल बजट नहीं आया है।
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सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरिदेव कांबोज का कहना है कि लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। प्रशासन द्वारा दिए गए समय 30 जून तक बाढ़ राहत के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। पत्थरों के साइज के बारे में उन्होंने कहा कि साइट पर काम करने वाले मजदूर अधिकतर अनपढ़ होते हैं और वे केवल वजन का अंदाजा लगाकर पत्थर स्टड में लगा देते हैं। विभाग की ओर से ऐसे कामों के लिए एक से दो प्रतिशत तक की काट काटी जाती है।
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