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Rohtak News: 16 गांव नहीं चाहते शराब का ठेका

Thu, 25 Apr 2024 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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झज्जर। कलह और विवाद की वजह बनी शराब से ग्रामीण तौबा करने लगे हैं। जिले के 16 गांव अपने यहां शराब का ठेका नही चाहते। यहां की ग्राम पंचायतों ने सर्वसम्मति से इसका प्रस्ताव पास करके आबकारी विभाग को भेज दिया है। इन पंचायतों का साफ कहना है कि उनके गांव में ठेका न खोला जाए। अब चंडीगढ़ मुख्यालय में आबकारी व कराधान आयुक्त के सामने पेशी के दौरान फैसला होगा कि इन गांवों में ठेके खुलेंगे या नहीं।
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गांवों में शराब ठेकों के कारण बढ़ रहे लड़ाई-झगड़ों और बिगड़ रहे भाईचारे से परेशान होकर 16 गांव पंचायतों ने यह प्रस्ताव पास किया है। इन पंचायताें ने आबकारी व कराधान विभाग से गुहार लगाई है कि अगले वित्तीय वर्ष से उनके गांव में शराब ठेका न खोला जाएगा। प्रस्ताव में ग्राम सभा के 1/10 सदस्यों ने अपने हस्ताक्षरित पत्र को आबकारी विभाग अधिकारी को सौंपे है। ग्रामीणों का तर्क है कि शराब के सेवन करने से युवा अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिससे परिवार के साथ समाज का भी पतन हो रहा है। इस बार 12 जून से नए ठेकों जारी करने का कार्यक्रम निर्धारित हुआ है। लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद यह कार्रवाई होगी। विभाग ने 15 जनवरी तक शराब ठेके न खोलने को लेकर ग्राम पंचायतों से आवेदन मांगे थे इस पर 16 आवेदन विभाग के पास आए थे।

इन ग्राम पंचायतों ने सौंपे प्रस्ताव
जिले की मुकुन्दपुर, दुबलधन, किरमाण, किरमाण बिध्यान, बाघपुर, मांगावास, माजरा बी, बिलोचपुरा, भिंडावास, शाहजहांपुर, रणखंडा, खोरड़ा, दुजाना, सिलानी केशो, मदाना खुर्द, कड़ोदा व नंगला पंचायतों ने अपने पत्र सौंपे हैं। इन्होंने मांग की है कि उनके गांव में इस बार शराब ठेके न खोले जाए।
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क्या है नियम

ग्राम सभा पंचायत के 1/10 सदस्यों के हस्ताक्षर हुए पत्र आबकारी विभाग को देने होते हैं। इसके अलावा गांव में किसी भी ग्रामीण पर आबकारी विभाग द्वारा पिछले दो सालों में कोई भी केस दर्ज नहीं होना चाहिए।

जिले में शराब के ठेकों के आंकड़े

कुल जोन - 35


मुख्य ठेके - 70

उप ठेके -220

जिले में कुल ठेके - 290

वर्जन
जिले की 16 ग्राम पंचायतों की तरफ से शराब ठेका न खोलने का प्रस्ताव दिया गया है। उसे मुख्यालय भेज दिया गया है। मुख्यालय की तरफ से फैसला किया जाना है कि संबंधित गांवों में शराब ठेका खुलेगा या नहीं?
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डॉ. अनिरुद्ध शर्मा, डीईटीसी, झज्जर
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