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सरकारी व निजी डॉक्टर हड़ताल पर , मरीज परेशान, 24 पर कार्रवाई की तलवार

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रेवाड़ी। अस्पतालों में तीमारदारों द्वारा की जाने वाली हिंसा के खिलाफ सोमवार को निजी के साथ सरकारी चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर देशभर में निजी चिकित्सकों ने सोमवार को चौबीस घंटे की हड़ताल का एलान किया हुआ था। हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन ने भी हड़ताल में शामिल होने का अल्टीमेटम देे दिया। इधर हालात को संभालने के लिए सोमवार को सरकारी छुट्टी होते ही भी सरकार ने डॉक्टर व अन्य स्टाफ की छुट्टी रद्द करते हुए ड्यूटी पर तैनाती के आदेश दिए, लेकिन सरकारी डॉक्टरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। शहर के नागरिक अस्पताल के 32 मेडिकल ऑफिसर (एमओ) में से महज 8 एमओ ही हाजिर रहे। सोमवार को छुट्टी रद्द होने के चलते सुबह पैरा मेडिकल स्टाफ तो ड्यूटी पर पहुंच गया, लेकिन डॉक्टरों के नहीं आने से अस्पताल पहुंचे रहे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत नियुक्त डॉक्टरों बुलाया। तीन घंटे की देरी से ओपीडी शुरूहो सकी। इधर एमएस ने हड़ताली 24 एमओ की डिटेल सरकार के पास भेज दी है। ऐसे में इन डॉक्टर पर कार्रवाई संभव है।
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15 जून को ही छुट्टी कर दी गई थी रद्द, नहीं हुआ असर
कोलकाता में चिकित्सकों के साथ मारपीट व इसके बाद सरकार के रवैये से नाराज देश भर के डॉक्टर विरोध कर रहे थे। हालात सुधरते नहीं देख आईएमए ने देशव्यापी 17 जून को हड़ताल का आह्वान किया हुआ था। 17 जून को सरकारी छुट्टी थी, लेकिन मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए सरकार ने 15 जून को ही डॉक्टरा व अन्य स्टाफ की छुट्टी को रद्द कर दिया था। बावजूद इसके 16 जून को हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन ने हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया था। इसके चलते ही सोमवार को अस्पताल आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
770 मरीजों की हुई ओपीडी
आम दिनों में शहर के नागरिक अस्पताल में करीब दो हजार मरीजों की ओपीडी की जाती है। सोमवार को सरकारी डॉक्टर की केवल ओपीडी की हड़ताल थी इमरजेंसी सेवाएं बहाल रखी हुई थी। डॉक्टरों की माने तो 770 में से करीब 400 मरीज ऐसे थे जो शहर में निजी डॉक्टर के पास उपचार के लिए आए थे। लेकिन यहां पर हड़ताल होने के चलते उन्हें सरकारी अस्पताल में जाना पड़ा। यहां पर ये मरीज सरकारी व्यवस्थाओं में खामियां गिनाते नजर आए। सोमवार को नागरिक अस्पताल में हुई ओपीडी में 670 नए और 100 पुराने मरीज थे।
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प्राइवेट से नागरिक अस्पताल यहां पर भी हड़ताल
शहर से सटे ढालियावास में एक महिला को दवाई रिएक्शन करने के केस में नाईवाली चौक स्थित एक अस्पताल में लाया गया था। लेकिन यहां पर हड़ताल का हवाला देकर भर्ती करने से मना कर दिया गया। परिजन मरीज को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां पर भी हड़ताल बता वापस भेज दिया गया। इसके बाद परिजन मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, यहां पर देर शाम तक मरीज की हालत नाजुक बनी हुई थी।
इंतजार में घंटो बैठना पड़ा

शहर का अनिल वर्मा ने कहा कि वे अपनी रिश्तेदार को निजी अस्पताल लेकर आए थे। वहां पर हड़ताल मिली तो नागरिक अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां पर भी डॉक्टर नहीं मिले। अधिकारियों को शिकायत की तो करीब 12 बजे डॉक्टर आए तब मरीज को दिखाया।
व्यवस्था बहुत खराब है
शहर निवासी कल्याणदास ने कहा कि हड़ताल होने के चलते अस्पताल में न तो सफाई व्यवस्था और नहीं उपचार। पहले पर्ची कटवाने के लिए इंतजार करना पड़ा, इसके बाद डॉक्टर नहीं मिले। जिस डॉक्टर को दिखाना तो वह हड़ताल पर था, अब मंगलवार को आना पड़ेगा।
मॉनिटरिंग कमेटी की जांच के बाद ही हो मुकदमा दर्ज: आईएमए
आईएमए अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र यादव ने कहा कि डॉक्टर पूरी जिम्मेदारी के साथ मरीज का उपचार करते हैं। कोई डॉक्टर नहीं चाहता कि उसका केस बिगड़े, लेकिन कई तीमारदार बेवजह हिंसक हो जाते हैं और पुलिस आनन-फानन में डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर देते हैं। यह पूरी तरह से गलत है। मेडिकल नेगलिजेंस बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद ही मुकदमा दर्ज होना चाहिए। सरकार को अस्पतालों में होने वाली हिंसा के लिए सेंट्रल एक्ट बनाकर दोषियों की नॉन बेलेबल गिरफ्तारी होनी चाहिए। सोमवार को आईएमए द्वारा बुलाई गई पीसी में प्रवक्ता डॉ शिव रतन यादव, आईडीए की ओर से डॉ. अनिल यादव, डॉ. उर्मिला यादव, डॉ. एनएस यादव, डॉ. तारा सक्सेना, डॉ. करतार सिंह, डॉ. राजेश गोयल व अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।
चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा नहीं बर्दाश्त: एचएसीएमए
हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन रेवाड़ी के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने कहा कि चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। मरीज व डॉक्टर बीच एक विश्वास का रिश्ता होता है। डॉक्टर का प्रयास हमेशा मरीज के स्वास्थ्य को अच्छा करता होता है। प्रदेश स्तरीय यूनियन के आह्वान पर आज हड़ताल की गई है। सरकार को भी विरोध की बजाय हिंसा के खिलाफ कानून बनाने पर काम करना चाहिए। सरकारी चिकित्सकों ने नागरिक अस्पताल के सभागार में एकत्रित होकर कोलकाता में डॉक्टरों के खिलाफ मारपीट की निंदा की।
पूरी तरह से व्यवस्था को रखा गया है दुरुस्त: एमएस
नागरिक अस्पताल के एमएस डॉ. सर्वजीत थापर ने कहा कि 15 जून को ही छुट्टी रद्द होने की सूचना पूरे स्टाफ को दे दी गई थी। केवल 8 डॉक्टर हाजिर रहे। गैर हाजिर डॉक्टर की लिस्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। नागरिक अस्पताल मेें सोमवार को व्यवस्था पूरी तरह से ठीक रही, कुछ देरी बाद पूरी ओपीडी की गई।
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