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ये राह नहीं आसान, हर रोज अभ्यास कर, सालों की मेहनत व हजारों के खर्च के बाद हासिल होता है कोई मुकाम

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रोहतक। एक साधारण बच्चा जब पहली बार मैदान पर उतरता है, तो उसके सपने बहुत बड़े होते हैं। ज्यादातर खिलाड़ी आईपीएल और टीम इंडिया में खेलने के सपने लेकर आता है, परंतु उसे राज्य स्तरीय टूर्नामेंट के मुकाबले खेलने तक कम से कम तीन से चार वर्ष का समय लग जाता है। इन सपनों को हकीकत का जामा पहनाने तक की राह आसान नहीं होती, इन सपनों तक पहुंचने के लिए एक खिलाड़ी के साथ-साथ उसके कोच को भी लगातार ग्राउंड व नेट पर पसीना बहाना होता है। यह कहना है शहर के राजीव गांधी खेल परिसर स्थित क्रिकेट स्टेडियम में क्रिकेट कोच शक्ति रोज का। उनके पास हर रोज लगभग 80-85 खिलाड़ी हर रोज मैच का अभ्यास करने आते हैं।
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उन्होंने बताया कि 30 मई से इंग्लैंड में क्रिकेट का महाकुंभ शुरू होने के साथ ही उनके पास नवोदित खिलाड़ियों की संख्या में एकदम से उछाल सा आया है। उन्होंने बताया कि हर रोज खिलाड़ियों को नेट पर बल्लेबाजी व गेंदबाजी की स्किल्स पर काम करने के साथ-साथ ग्राउंड पर फील्डिंग पर भी काम करना होता है। इसके अतिरिक्त उन सभी खिलाड़ियों को जिम में भी पसीना बहाना होता है जिससे उनकी मसल्स मजबूत हो सकें। इसके अतिरिक्त उन्हें रूटीन स्ट्रेचिंग भी करनी होती है। हर खिलाड़ी लगभग हर रोज पांच से छह घंटे मैदान पर मेहनत करनी होती है। कोच ने बताया कि जब एक खिलाड़ी राज्य स्तरीय टूर्नामेंट या बीसीसीआई के अन्य टूर्नामेंट खेलने के काबिल हो जाता है, उसके बाद उस खिलाड़ी की एक वर्ष तक सीजन स्पेशल ट्रेनिंग करवाई जाती है। जिसमें वो खिलाड़ी हर मौसम के हिसाब से अपने आप को ढाल सके व अलग अलग पिच कंडीशन पर बेहतर खेल का प्रदर्शन कर सकें।

किसी को फैमिली से सपोर्ट नहीं मिलता को किसी को खर्च
क्रिकेट कोच शक्ति रोज ने बताया कि एक साधारण से बच्चे से एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने की प्रक्रिया में कई तरह की परेशानियां होती हैं। इन परेशानियों में तीन मुख्य तरह की परेशानियां होती हैं। जिनमें से एक है खिलाड़ी को घर वालों की ओर से सपोर्ट न मिलना। दूसरा है खिलाड़ी के घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होना वहीं तीसरी परेशानी जब होती है जब खिलाड़ी खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी अच्छा हो। ऐसी कंडीशन में उसके घर वाले उस समय उसे खेलने से रोक लेंगे जब उस खिलाड़ी की बोर्ड की क्लास होगी या फिर वो बारहवीं पास करके कॉलेज जाने लगेगा। उस समय में उसके परिवार वाले उसे क्रिकेट खेलने से रोकेंगे व मन लगाकर पढ़ाई करने की बात कहेंगे। इसी समय पर वह खिलाड़ी अपनी प्रैक्टिस के पीक पर होता है।
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70 से 75 रुपये सालाना होता है एक खिलाड़ी का खर्च
क्रिकेट कोच शक्ति रोज ने बताया कि क्रिकेट दूसरे खेलों की बजाए थोड़ा सा महंगा खेल है। इस खेल का सामान थोड़ा सा मंहगा आता है। उन्होंने बताया कि इस खेल में एक आम खिलाड़ी के कम से कम 70-75 हजार रुपये सालाना खर्च हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि 20-25 रुपये तो अकेले बैट पर ही साल भर में खर्च हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त 20 से 25 हजार रुपये अन्य प्रोटेक्टिंग किट पर खर्च हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त सात 10-15 हजार रुपये जूतों पर खर्च हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त 15 हजार रुपये सालाना जिम व डाइट पर आसानी से खर्च हो जाते हैं।
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