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खेलों को सिर्फ चार दिन बाकी हैं और अब खेल उपकरणों की आई याद

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हरीश पौड़िया
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रोहतक। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) की ओर आयोजित 64वें नेशनल स्कूल एथलेटिक्स खेलों की मेजबानी रोहतक को मिली है। देश भर की 44 टीमें इन खेलों में भाग लेंगी। जिला शिक्षा विभाग को एथलेटिक्स खेलो के उपकरणों के इंतजाम की तब याद आ रही है, जब इन खेलो के आयोजन को महज चार दिन शेष बचे है। अब जिला शिक्षा विभाग महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, जिला खेल विभाग और विभिन्न खेल नर्सरी से खेल उपकरणों के जुगाड़ में लगा है। आठ से 12 फरवरी तक शहर के राजीव गांधी खेल परिसर में अंडर-14 (लड़के व लड़कियां) की 64वीं नेशनल स्कूल एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश भर की 44 टीमों के खिलाड़ी भाग लेंगे। शहर में होने वाली राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में चार दिन ही शेष रह गए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इस प्रतियोगिता में प्रयोग होने वाले उपकरणों का अब इधर- उधर से जुगाड़ करने में लगे हुए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रतियोगिता के लिए कुछ उपकरण एमडीयू से और कुछ जिले के विभिन्न स्कूलों में चल रही खेल नर्सियों से मंगाए जा रहे हैं।
बॉक्स :
एमडीयू से मिलेंगे ये उपकरण :
- शिक्षा विभाग ने एमडीयू से विभिन्न दौड़ स्पर्धाओं में प्रयोग होने वाला सामान, ऊंची कूद, लंबी कूद व शॉट पुट में प्रयोग होने वाले सामान की मांग की है। प्रतियोगिता में 80 मीटर हर्डल दौड़ में 64 हर्डल का प्रयोग किया जाएगा। जिनमें से विभाग ने लगभग 35 से 40 हर्डल की मांग एमडीयू से की है। इसके साथ विभाग ने एमडीयू से हाई जंप खेल में प्रयोग होने वाली पिट, शॉट पुट में प्रयोग होने वाला स्टॉक बोर्ड, लॉन्ग जंप में प्रयोग होने वाला टेक ऑफ बोर्ड और आठ स्टॉप वाच की मांग की है।
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कोट्स
खेल उपकरण डीएसओ के पास या फिर यूनिवर्सिटी के पास होते है। खेल का डिपार्टमेंट डीएसओ के पास होता है, जो हमारा ही डिपार्टमेंट है। सामान तो कहीं से भी ले सकते हैं, हर्डल के ज्यादा बच्चे प्राइवेट स्कूलों से ही आते हैं। जिन सरकारी स्कूलों के बच्चों को हर्डल खेल में चुना होगा, वहां हर्डल अवश्य होगा। यह तो मेरी जिम्मेदारी है कि उपकरण कहां से लेकर आने हैं। अगर कोई खिलाड़ी राज्य स्तरीय टीम में चुना गया है तो उसने तैयारी हर्डल रहने पर ही की गई होगी। बच्चे अपने साथ तो हर्डल लेकर नहीं आएंगे। रोहतक में देशभर के बच्चों को खिला रहे हैं। 850 बच्चों के लिए तो हमें बाहर से सामान लेना ही पड़ेगा। आपके घर में कोई शादी हो तो आपको बाहर से बर्तन मंगवाने पड़ते हैं क्योंकि उस दिन घर में बहुत सारे मेहमान होते हैं।
- परमेश्वरी हुड्डा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रोहतक
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