पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए बना रहे थे योजना
चरखी दादरी।
अगले तीन दिनों में जिले में दो हत्याएं करने की योजना बनाते चरखी निवासी विजय व नीरज को जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों पुरानी रंजिश के चलते ही हत्याओं को अंजाम देने वाले थे। पहले भी ये दोनों आपराधिक मामलों में संलिप्त रह चुके हैं और फिलहाल विजय पैरोल पर व नीरज बेल पर बाहर आया हुआ था। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि विजय की पैरोल चार अप्रैल को खत्म होनी थी और इससे पहल ही इन वारदातों को अंजाम देने की फिराक में वो था। उसके कबूलनामे के बाद ही पुलिस ने साजिश रचने के दूसरे आरोपी नीरज को गिरफ्तार किया।
सूत्रों की मानें तो ये दोनों चरखी निवासी ही दो लोगों को मौत के घाट उतारने की प्लानिंग किए बैठे थे। आरोपी विजय पर चरखी दादरी, भिवानी, झज्जर, महेंद्रगढ़ व रोहतक में 22 मामले दर्ज हैं। कुछ मामलों में वह बरी भी हो चुका है। पुलिस अधीक्षक हिमांशु गर्ग ने बताया कि पूर्व सरपंच कुलदीप के बेटे नीरज को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वह भी इस साजिश में शामिल था। हालांकि पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर जिनकी हत्याएं की जानी थीं उनके नाम उजागर नहीं किए। सूत्रों की मानें तो ये दोनों पुरानी रंजिश के चलते दो लोगों को मर्डर करने वाले थे और इनमें एक नामी भाजपा नेता का नाम भी शामिल है।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक हिमांशु गर्ग ने कहा कि आरोपी विजय का अपराधिक रिकॉर्ड कई साल पुराना है और उस पर करीब 22 मामले दर्ज हैं। आरोपी पर पांच जिलों में लूट, डकैती, हत्या, हत्या का प्रयास सहित धमकी देने के मामले दर्ज हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि विजय गत 20 फरवरी को ही पैरोल पर आया था और इसके बाद से ही पुलिस उस पर नजर रख रही थी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जब विजय पर नजर रखी गई तो उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगी। इसके बाद पुलिस की साइबर सेल सहित सिटी थाना पुलिस, सीआईए-1, सीआईए-2 व स्पेशल सेल की संयुक्त टीम गठित की गई। इस टीम ने चरखी गांव में दबिश देकर आरोपी विजय को काबू कर लिया। उसके पास से पुलिस को दो राइफल व दस कारतूस भी मिले। इसके बाद उससे पूछताछ करने पर नीरज नामक युवक का नाम भी सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम ने नीरज को भी काबू कर लिया। आरोपी विजय को पुलिस ने सोमवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है जबकि नीरज से भी पूछताछ जारी है।
फरीदाबाद जेल में बंद था 22 मामलों का आरोपी विजय
एक के बाद एक 22 वारदातें करने वाला विजय पंडित पिछले कई सालों से अपराधिक की दुनिया में सक्रिय है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह फरीदाबाद जेल में बंद था और गत 20 फरवरी को पैराल पर बाहर आया था। चार अप्रैल को उसे पैरोल खत्म होने पर वापिस जेल पहुंचना था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इससे पहले वह गत साल 23 अक्तूबर को पैरोल पर बाहर आया था और गत 20 दिसंबर को ही जेल वापिस लौटा था। आठ अप्रैल 2004 को विजय के खिलाफ सदर पुलिस थाने में एचजीसीपी एक्ट के तहत व 14 नवंबर 2007 को मारपीट व धमकी देने संबंधी केस दर्ज हुआ था। 12 अगस्त 1994 को उसके खिलाफ भिवानी सिविल लाइन थाने में, 28 अप्रैल 1996 में दिल्ली के मंगोलपुरी थाने में हत्या के प्रयास का, आठ अप्रैल को दादरी शहर थाने में, 17 व 19 जनवरी 1996 को झज्जर थाने में दो मामले दर्ज हुए थे। इसके अलावा उस पर 19 दिसंबर 2001 को शहर थाने में हत्या के प्रयास का व 20 सितंबर 2009 को हत्या का मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा भी विजय पर झज्जर जिले के साल्हावास व भिवानी जिले के बवानीखेड़ा थानों में मामले दर्ज हैं।
तीन मामलों में बरी भी हो चुका है विजय
तीन अप्रैल 1997 को विजय पर दादरी सदर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में वह 21 अगस्त 2008 को बरी हो गया। 14 नवंबर 2007 को उसके खिलाफ सदर थाने में दर्ज हुआ और इस मामले 10 सितंबर 2009 को वह बरी हो गया। 12 सितंबर 1994 में उसके खिलाफ भिवानी सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज हुआ था और वह 25 मार्च 2009 को बरी हो गया।
नीरज ने स्कूली छात्र पर पिता की लाइसेंसी बंदूक से चलाई थी गोली
करीब दो साल पूर्व विमानपत्तन वाली गली के सामने दो बाइक सवारों ने स्कूली वाहन का इंतजार कर रहे छात्र रूद्रकांत को गोली मारी थी। रूद्रकांत को सिविल अस्पताल से पीजीआई रोहतक रेफर किया था। वहीं, पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए नीरज व उसके एक साथी को गिरफ्तार भी किया था। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने खुला़ किया था कि उसने अपनी पिता की लाइसेंसी बंदूक से वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में नीरज एक साल की सजा काट चुका है और बेल पर बाहर आया हुआ है।
लंबी दूरी तक निशान साधने में मददगार हैं दोनों राइफलें
पुलिस टीम ने विजय पंडित के पास से एक 315 बोर की राइफल व पांच कारतूस तथा 15 बोर की दुनाली राइफल सहित पांच कारतूस बरामद किए हैं। इन हथियारों के जानकारों की मानें तो 315 बोर की राइफल पर जूम-इन व आउट करने के लिए 200 मीटर प्लस, माइनस की दुरबीन लगी हुई हैं। इससे स्नाइपर की तरह ही दूर से टारगेट पर निशाना लगाया जा सकता है। इसकी कीमत एक से डेढ़ लाख रुपये की है। सूत्रों की मानें तो विजय पंडित ये राइफल अपने किसी दोस्त से लाया था।
ये बिंदु पुलिस के लिए जांच का विषय
- लाइसेंस वाली दोनों राइफलें विजय कहां से लाया, कहीं ये चोरी के हथियार तो नहीं।
- आरोपियों से जो सोनीपत नंबर की सफारी गाड़ी बरामद हुई है वह किसकी है।
- हत्या की साजिश में और कौन-कौन हैं शामिल, कब व कैसे देते वारदातों को अंजाम।
फिरौती न देने पर आढ़ती की हत्या में था शामिल
2008 में अनाज मंडी के आढ़ती राधे श्याम से फिरौती मांगी गई थी। फिरौति न देने पर उनकी गाली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में सिटी थाना पुलिस में हत्या सहित विभिन्न धाराआें के तहत मामला दर्ज हुआ था। विजय पंडित इस मामले में भी नामजद था।
वर्जन::
राइफलें किसके लाइसेंस पर हैं इनका हम पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं। सफारी गाड़ी की भी हमने जांच शुरू कर दी है। आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है। जांच में जो खुलासा होगा उसी आधार पर पुलिस कार्रवाई अमल में लाएगी।
हिमांशु गर्ग, एसपी