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जसिया की जाट महारैली

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फोटो सहित...............
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जसिया की जाट महारैली : जाट नेताओं का सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
: 19 मार्च 2017 का समझौता पूरा करें, नहीं तो दोबारा आंदोलन
: शीतकालीन सत्र में विधेयक पास कर जाटों को केंद्र की ओबीसी सूची किया जाए शामिल
: 3 दिसंबर को जाट आरक्षण संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात मीटिंग
: मांगे पूरी नहीं की तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को नहीं घुसने देंगे गांवों में : अशोक बल्हारा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश सरकार जाट समाज को आरक्षण, जेलों में बंद सभी युवाओं को रिहा करने व आंदोलन के दौरान दर्ज सभी केस वापस लेने की एक सप्ताह में सरकार पूरी करे, नहीं तो जाट समाज दोबारा से आंदोलन शुरू कर देगा। इसके लिए 3 दिसंबर को जसिया में जाट आरक्षण संघर्ष समिति की राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी की आपात मीटिंग होगी, जिसमें आंदोलन को दोबारा शुरू करने की रणनीति पर फैसला होगा।
रविवार को जसिया में जाट महारैली व भूमि पूजन पर जाट नेताओं ने यह अल्टीमेटम दिया। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता नेता यशपाल मलिक व अशोक बल्हारा ने मंच से साफ किया कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो फरवरी व मार्च माह से गांवों के अंदर मुख्यमंत्री व सरकार के मंत्रियों को घुसने नहीं देंगे। रैली में आठ प्रस्ताव पास किए गए, जिसमें साफ किया गया कि दीनबंधु छोटूराम प्रतियोगी परीक्षा एवं कौशल विकास संस्थान का भूमि पूजन व शिलान्यास पूरा हुआ। संस्थान का निर्माण कार्य 3 दिसंबर को शुरू हो जाएगा जबकि मुख्य बिल्डिंग का निर्माण कार्य जनवरी 2018 में बसंत पंचमी के दिन शुरू होगा। दूसरे प्रदेशों में रह रहे जाट समाज के लोगों से भी सहयोग लिया जाएगा, सीएम मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह व पीपी चौधरी की मौजूदगी में 19 मार्च 2017 को हुए समझौते को सरकार तुरंत पूरा करे, केंद्र सरकार शीत कालीन सत्र में राष्ट्रीय सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग आयोग का संशोधन विधेयक संसद में पास करवाकर जाटों को ओबीसी में शामिल करे। सरकार के साथ हुए समझौते की समीक्षा और आंदोलन की आगामी रूपरेखा तैयार करने के लिए 3 दिसंबर को जाट आरक्षण संघर्ष समिति की जसिया में मीटिंग होगी।
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नहीं घुसने देंगे सीएम व मंत्रियों को गांवों में
जाट नेता अशोक बल्हारा ने मंच से ऐलान किया कि जाट आरक्षण व दूसरी मांगों को लेकर सरकार को रुख सकारात्मक नहीं है। मार्च माह में केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में हुए समझौते को लागू करने में देरी की जा रही है। सरकार ने जल्द मांगों को पूरा नहीं किया तो सीएम मनोहरलाल खट्टर व उनके मंत्रियों को गांवों के अंदर नहीं घुसने देंगे। इतना ही नहीं, एक मंत्री के इशारे पर कुछ लोग रैली को फेल करना चाहते थे, लेकिन जाट समाज ने एकजुटता दिखाकर ऐसे लोगों के प्रयासों को नाकाम कर दिया है। जो लोग गुमराह हो गए हैं, उन्हें भी समझा बुझाकर एक मंच पर लाया जाएगा।
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