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परिषद हाउस बैठक की गरिमा को ठेस पहुंचने से पुराने पार्षद आहत

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परिषद हाउस बैठक की गरिमा को ठेस पहुंचने से पुराने पार्षद आह्त
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चरखी दादरी।
मौजूदा पार्षदों की जुबानीं झड़प व तोड़फोड़ से वीरवार को परिषद हाउस की बैठक की गरिमा तार-तार होने का पुराने पार्षदों को भी मलाल है। बैठक में पार्षदों का जो रवैया देखने को मिला है उससे शहर के पुराने पूर्व पार्षद व पूर्व चेयरमैन हतप्रभ हैं। इन पूर्व पार्षदों व पूर्व चेयरमैन आदि ने पार्षदों के बीच हुए हंगामे की घटना की कड़ी निंदा की है। इन लोगों ने पार्षदों से परिषद हाउस की मीटिंग में सदैव गरिमा बनाए रखे जाने की अपील की है। पूर्व में पार्षद रहे इन बुजुर्गों का मानना है कि मतभेद हो सकता है लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। हाउस की प्रत्येक मीटिंग में जिले के लिहाज से विकास का खाका तैयार करना चाहिए।
बाक्स: क्या दी घटना पर पुराने पार्षदों ने प्रतिक्रिया
:: नगरपालिका के समय 2005 में चेयरमैन रहे मोतीलाल बिंदल ने पार्षद मीटिंग के दौरान हुई इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पार्षद व चेयरमैन को शहर विकास मिलजुलकर करना चाहिए। कोई भी मीटिंग हो वह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न होनी चाहिए। कोई पार्षद अगर संतुष्ट नहीं हो तो परिषद व प्रशासन के उच्चाधिकारियों केे सामने मामले को रखा जा सकता है लेकिन परिषद की बैठक में हंगामा करना अशोभनीय है।
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==शहर की पूर्व पार्षद धर्मा देवी का कहना है कि उनके समय में परिषद की सौहार्दपूर्ण वातावरण में बैठकें होती थी। पूर्व पार्षद धर्मा देवी ने वीरवार की पार्षदों की मीटिंग में हुई अशोभनीय घटना की घोर निंदा की है। उनका कहना है पार्षदों व चेयरमैन को परस्पर आपस में मिल-जुलकर शहर का विकास करना चाहिए। बिना दुर्भावना के सभी पार्षदों व चेयरमैन को शहर का समुचित विकास करना चाहिए। नई पीढ़ी के इन पार्षदों को गरिमा का ख्याल रखना चाहिए।
==करीब 15 वर्ष पूर्व शहर की पार्षद रह चुकी पूर्व महिला पार्षद केला देवी का कहना है कि सभी पार्षद व चेयरमैन मिल बैठकर शहर के विकास का खाका तैयार करतेे थे। अब युवा ब्लड है, उन्हें परिषद हाउस की मीटिंग में सदन की गरिमा को लेकर सोचना चाहिए। मीटिंग में कभी झगड़ा नहीं करना चाहिए।
== 1991 से 2000 तक शहर के पार्षद रह चुके गंगाराम बिरोहड़िया का कहना है कि परिषद हाउस की बैठक में अभद्र व्यवहार व मारपीट करना शिष्टाचार के खिलाफ है। बैठक में प्रत्येक पार्षद को शालीनता सेे अपनी बात रखने का अधिकार जरूर है लेकिन बैठक की गरिमा को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। संतुष्ट न होने पर कोई भी पार्षद नियमानुसार शिकायत उपायुक्त से कर सकता है।
1990 से 1995 तक शहर के पार्षद रह चुके प्रीतम जांगड़ा ने भी वीरवार की पार्षदों की मीटिंग में हुए हंगामे व आपसी झड़प की कड़ी निंदा की है। पार्षद प्रीतम जांगड़ा का कहना है कि पार्षदों व चेयरमैन को मिल-जुलकर शहर का विकास करना चाहिए। प्रत्येक वार्ड का समुचित विकास हो। हाउस मीटिंग में अशिष्ट शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। बैठक की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।
शहर के दो बार पार्षद रह चुके भगतराम का कहना है कि परिषद की जितनी सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपंन होगी उतने प्रस्ताव जल्द व समय पर पारित होंगे। उन्होंने भी वीरवार की पार्षदों की मीटिंग में हुई झड़प की घोर निंदा करते हुए सभी पार्षदों को गरिमा में रहते मीटिंग मेें अपने विचार रखने की बात कही।
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जिस पार्षद ने परिषद हाउस की मीटिंग की गरिमा को भंग किया है उसे पार्षद को निलंबित किया जाना चाहिए। उनकी यही एक मांग है। डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा।
चेयरमैन संजय छपारिया, नगर परिषद चरखी दादरी
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