सांपला। किसी भी नहर या नदी में गंदा पानी छोड़े जाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया हुआ है। बावजूद इसके कस्बे का सारा गंदा पानी दुलहेड़ा नहर में डाला जा रहा है। वर्षों से शहर का गंदा पानी नहर में डाला जा रहा है।
किसी भी अधिकारी व कर्मचारी ने गंदे पानी को नहर में जाने से रोकने के लिए आज तक कोई कदम नहीं उठाया। इससे न्यायालय के आदेशों का शहर में खुला उल्लंघन हो रहा है। नियमानुसार गंदा पानी नहर में छोड़े जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नहरी विभाग द्वारा पुलिस में मामला दर्ज कराया जा सकता है, लेकिन आज तक नहरी विभाग ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
एसडीएम को दिया ज्ञापन
दूल्हेड़ा माइनर में डाले जा रहे कस्बे के गंदे पानी को लेकर मंगलवार को कस्बे के लोग एसडीएम उत्सव से मिले। ज्ञापन देकर गंदे पानी को बंद करने की मांग की। सुंदर, प्रदीप, रोक, मनीष, सोनू ने कहा कि कस्बे का गंदा पानी नहर में डाला रहा है। यह पानी नहरे के माध्यम से जल घरों में जा रहा है। कस्बे की करीब 22000 जनता पब्लिक हेल्थ द्वारा सप्लाई किए जाने वाले इस पानी को पी रही है। इस गंदे पानी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। लोगों ने इसे बंद करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार करीब 1968 में पूर्व मंत्री व सीएम रहे चौधरी बंसीलाल ने सांपला व आसपास में बाढ़ के पानी की निकासी के लिए बेरी मार्ग दुल्हेड़ा माइनर पर पंप सेट लगवाए गए थे। बाढ़ का पानी लिफ्टिंग से नहर में डाला जाता है।