रोहतक। पीजीआई में गर्भवती को खून के अभाव में तड़पते देखा तो महम के प्रधानाध्यापक ने रक्त के लिए किसी की मौत न हो, इसलिए रक्तदान शिविर लगाने का निर्णय लिया। वर्ष 1997 से लेकर अब तक रिटायर्ड प्रधानाध्यापक 117 रक्तदान शिविर लगा चुके हैं। इस कार्य के लिए राज्यपाल से लेकर कई सामाजिक संगठन रिटायर्ड प्रधानाध्यापक को सम्मानित कर चुके हैं।
मूल रूप से महम के शिवा मार्केट के रहने वाले रिटायर्ड प्रधानाध्यापक बसंत लाल गिरधर ने बताया कि वर्ष 1997 में वह पीजीआई में अपने परिवार के एक सदस्य को चिकित्सकों के पास दिखाने के लिए गया गए थे। इसी बीच देखा कि खून के अभाव में गर्भवती महिला पीजीआई में तड़प रही है। पीजीआई में उस समय खून की कमी चल रही थी। देखा कि रिश्तेदारों तक ने खून देने से गर्भवती को साफ इनकार कर दिया। हालांकि बाद में एक अनजान युवक ने गर्भवती को खून देकर उसकी जान बचाई। उसी समय उन्होंने ठान लिया कि किसी की खून के अभाव में मौत न हो, इसके लिए वह विभिन्न स्थानों पर जाकर रक्तदान शिविर लगाएंगे।
उन्होंने लोगों के सहयोग से जन सेवा समिति का गठन किया। वह रोहतक के अलावा पानीपत, कैथल, सोनीपत, फतेहाबाद, भिवानी, फतेहाबाद समेत विभिन्न जिलों के देहात क्षेत्र में जाकर रक्तदान शिविर लगाने लगे। प्रधानाध्यापक होने के साथ-साथ वह जब भी समय मिलता देहात क्षेत्र के गांवों में जाकर लोगों से गोष्ठी आदि के माध्यम से रक्तदान की अपील करते हैं। इस कार्य के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ मोटीवेटर का अवॉर्ड मिल चुका है।
सुरेश राठी का मिलता है सहयोग
बसंत लाल गिरधर ने बताया कि उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश राठी का भी पूरा सहयोग मिलता है। अब हाल ही में आगामी 16 अप्रैल को निंदाना में भी रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। बसंत लाल गिरधर ने बताया कि जो भी किसी जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता होती है तो वह तुरंत ही डोनर से संपर्क कर रक्त उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए उन्होंने पांचहजार से अधिक डोनर का ब्योरा तैयार कराया हुआ है।