सेक्टर-1 में महिलाओं का एक किट्टी ग्रुप ऐसा जो पार्टी की बजाय करता है हवन
- घर में हवन-यज्ञ से बच्चों में आते हैं संस्कार
- आर्य समाज से प्रेरणा लेकर पार्टी की जगह शुरू किया हवन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शहर में अनेकों किट्टी ग्रुप हैं जो होटलों और रेस्टोरेंट में पार्टी करती है। वहीं, कुछ किट्टी ग्रुप ऐसे भी हैं जो सेक्टरों और कॉलोनियों में रहते हुए घरों में ही गेट-टू-गेदर करती हैैं। इन पाटियों में तंबोला और अन्य गेम खेले जाते हैं और साथ ही पार्टियों में आउटिंग भी हो जाती है। लेकिन शहर में महिलाओं का एक किट्टी ग्रुप ऐसा भी है जो, पार्टियों की बजाय हवन-यज्ञ करता हैं। महिलाओं के इस ग्रुप की कुछ सदस्य आर्यसमाज से जुड़ी हुई है। इन्होंने आर्य समाज से प्रेरणा लेकर ही पार्टियों की बजाय हवन-यज्ञ करना शुरू किया। क्योंकि इससे घर में वातावरण भी शुद्ध होता है और मन के विकार भी दूर होते है। ग्रुप की लीडर इंदू जग्गा ने बताया कि उनका परिवार आर्य समाज से जुड़ा हुआ हैं। इसलिए वह बचपन से ही घर में हवन-यज्ञ और शांति पाठ होते देखती आ रही हैं। यहीं एक मुख्य वजह रहीं कि जब उन्होंने किट्टी ग्रुप शुरू किया तो उसमें पार्टियां और गेम न करके हवन-यज्ञ जैसे अलग कल्चर को शुरू किया। इससे वह घर और आसपास के वातावरण में शुद्धि भी कर सकती हैं और साथ ही हर महीने सभी मेंबरों के साथ गेट-टू-गेदर भी हो जाता है।
आज भी आर्यसमाज से जुड़े लोग अपने घरों में हवन-यज्ञ जैसे कार्यक्रम करवाते रहते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने को लेकर सेक्टर-1 और सेक्टर-2 की महिलाओं हर माह ग्रुप मेंबरों के घर पर जाकर हवन-यज्ञ करती हैं। इस ग्रुप में 22 सदस्य इंदू जग्गा, उमेश महता, सीमा अरोड़ा, पिंकी खुराना, सुनीता, पिंकी, पूनम पंडित, मिसेज नागपाल, मीनाक्षी शर्मा, अनीता, सीमा बाल्यान, प्रिया विज, नीरजा शर्मा, सुमन गुप्ता, लक्ष्मी, उषा भाटिया, निर्मल भाटिया, शालु अरोड़ा, किरण भाटिया, नर्मिता और नीतू भाटिया जुड़ी हैं। यह सभी सेक्टर-1, सेक्टर-2 और ओमेक्स सिटी की रहने वाली हैं। इस ग्रुप की सभी महिलाएं कामकाजी हैं, इसके बावजूद भी यह अपने घरेलू कामों और नौकरी से समय निकालकर हवन-यज्ञ को महत्व देती हैं।
--बच्चों में आते हैं संस्कार
ग्रुप मेंबर पूनम पंडित ने बताया कि हवन से घर में पूजा-पाठ भी हो जाता हैं। और बच्चों में संस्कार आते हैं। पूनम ने बताया कि होटल में जाकर पार्टी में रुपये की बर्बादी करने से अच्छा है कि घर पर रहकर ही कुछ अच्छा काम किया जाएं। जिससे सोसाइटी को भी कोई मैसेज दिया जा सकें।