अमर उजाला फालोअप
फ्लैग : नगर निगम की गोशाला के गोलमाल का मामला
हेडिंग : क्रास चेक होगा गोशाला का बिल, कमेटी की रिपोर्ट पर ही भुगतान
: तीन अधिकारियों की कमेटी करेगी निरीक्षण
: खिड़वाली गोशाला प्रकरण के बाद लिया आयुक्त ने फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नगर निगम गोशालाओं को अब आंख बंद करके बिलों का भुगतान नहीं करेगा। न केवल गोवंश की जांच पड़ताल की जाएगी, बल्कि तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट पर ही भुगतान होगा। निगम आयुक्त आरएस वर्मा ने यह फैसला किया है।
बता दें कि जिले में बेसहारा गोवंश की बड़ी समस्या है। गाय व नंदी सरेआम सड़कों पर खड़े रहते हैं, जो हादसे का सबब बनते रहे हैं। निगम की तरफ से कैटल फ्री अभियान चलाया गया था, जिसमें गोवंश को पकड़कर संस्थाओं की गोशालाओं में छोड़ा गया था। जबकि निगम की सरकारी गोशाला का संचालन भी निजी हाथों में है। संस्थाओं की गोशालाओं को जहां 50 रुपये प्रति दिन प्रति गाय के हिसाब से निगम भुगतान करता है, जबकि निगम की गोशाला का संचालन करने पर 21 रुपये प्रति गाय दिया जा रहा है। इस तरह निगम 50 लाख रुपये के करीब की राशि हर माह गोशालाओं को भुगतान कर रहा है। अब तक निगम सीधे ही बिलों का भुगतान कर रहा था, लेकिन नए आयुक्त ने खिड़वाली गोशाला प्रकरण के बाद सख्ती बढ़ा दी है।
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हर दिन की देनी होगी रिपोर्ट, अधिकारी करेंगे क्रास चैक
निगम आयुक्त ने हिदायत दी है कि गोशालाओं को एक निश्चित फार्म दिया जाए। उस फार्म के अंदर गोशाला की तरफ से तिथि, कुल गाय, बीमार गाय, मृत गाय, दुधारू गाय, बछड़े से लेकर बूढ़ी गायों का ब्योरा भरना होगा। यह रिकार्ड प्रतिदिन के हिसाब से भरा जाएगा। जब गोशाला बिल देगी तो निगम की टीम गोशाला में जाकर जांच पड़ताल करेगी। टीम की रिपोर्ट पर आयुक्त भुगतान करेंगे। किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता की जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी।
वर्जन
निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। खिड़वाली गोशाला मामले से निगम ने सबक लिया है। क्योंकि टैग गायब होने से यह साबित करना मुश्किल हो रहा है कि बची 266 गाय निगम की हैं या नहीं। इस कारण प्रतिदिन के हिसाब से गायों का ब्योरा तैयार करने की हिदायत दी है।
आरएस वर्मा, आयुक्त नगर निगम