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पीजीआई में नया टेंडर खुलने के बावजूद पुराने महंगे दामों पर खरीदे गए ऑक्सीजन सिलेंडर

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पीजीआई में नया टेंडर खुलने के बावजूद पुराने महंगे दामों पर खरीदे गए ऑक्सीजन सिलेंडर
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
गोरखपुर की तरह ऑक्सीजन सिलेंडर की कमीशन बाजी का खेल रोहतक के पीजीआई में भी देखने को मिल रहा है। पीजीआई प्रशासन नया टेंडर जारी होने के बावजूद पुराने टेंडर पर तीन महीने तक ऑक्सीजन के सिलेंडर लेता रहा। जबकि पुराने दाम नए टेंडर के दामों से काफी ज्यादा था। ऐसे में तीन महीने तक महंगे दामों में सिलेंडर की खरीदारी पीजीआई प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
वैसे तो पीजीआई में वार्डों में ऑक्सीजन गैस के लिए सीधी पाइप लाइन से सप्लाई है। जबकि विशेष परिस्थितियों के लिए सिलेंडरों की खरीदारी की जाती है। इन विशेष परिस्थितियों में पीजीआई मरीजों के इलाज में तीन प्रकार के ऑक्सीजन सिलेंडर इस्तेमाल करता है, जिसे ए, बी और डी श्रेणी में रखा गया है। ए श्रेणी में 610 लीटर, बी में 1360 लीटर और डी श्रेणी में 5100 लीटर ऑक्सीजन होती है। ऑक्सीजन सप्लाई के लिए दो स्थानों पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। ए श्रेणी के सिलेंडरों का प्रयोग ऑपरेशन थिएटर, बी का मरीजों को जांच या शिफ्टिंग के लिए इधर-उधर ले जाने में तथा डी श्रेणी के सिलेंडर आपातकालीन स्थिति में सेंट्रल सप्लाई के अंतर्गत इस्तेमाल में लाए जाते हैं।
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टैंक में पर्याप्त गैस
मौजूदा स्टॉक की बात करें तो संस्थान के पास अभी ए के 161, बी के 475 और डी के 150 सिलेंडर तकरीबन उपलब्ध हैं। इसके अलावा रोजाना 1200 किलोग्राम ऑक्सीजन की सप्लाई मुख्य सिस्टम से होती है। इसके टैंक में 11 हजार लीटर ऑक्सीजन होती है जोकि राजस्थान के भिवाड़ी से आती है। विभाग की मानें तो यह सिस्टम ऑनलाइन है। जैसे ही गैस कम होती है, सप्लाई अपने आप कंपनी भिजवा देती है। संस्थान करीब दो सप्ताह का स्टॉक रखता है।

तीन महीने तक चला खेल
सूत्रों की मानें तो संस्थान में पुराने टेंडर को खत्म होने के बाद नया टेंडर जारी किया। यह टेंडर भी पुराना टेंडर हासिल करने वाली कंपनी को मिला। हालांकि इस बार कंपनी ने ऑक्सीजन सिलेंडरों के दामों में काफी कमी। ऐसे में उसे टेंडर दे दिया गया। नया टेंडर जारी होने के बावजूद पीजीआई को पुराने टेंडर के महंगे दाम पर सिलेंडर दिए जाते रहे। यह सिलेंडर करीब तीन महीने तक दिए गए। हालांकि अब नए टेंडर के दामों पर सिलेंडर लिए जा रहे हैं, लेकिन तीन माह तक महंगे दाम में सिलेंडर की खरीदारी से पीजीआई प्रशासन सवालों के घेरे में है।
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सिलेंडर का प्रकार नई कीमत पुरानी कीमत
ए 22 45
बी 48 75
डी 140 160

बोले अधिकारी
यदि कहीं गड़बड़ी है और इसकी शिकायत आती है तो जांच करवाई जाएगी। टेंडर होने के बाद कागजी कार्रवाई में कुछ देरी हो सकती है। मरीजों को कोई समस्या न हो, इसके लिए सप्लाई नहीं रोकी जा सकती।
- डॉ. प्रशांत कुमार, प्रोफेसर हैड, पीआर विभाग, हेल्थ विवि
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