रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने के मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह के खिलाफ पुलिस जांच के नाम पर 22वीं तारीख पर भी सीजेएम की अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। सोमवार को अदालत में बचाव पक्ष ने आरोप पत्र का इंतजार किया, पुलिस चालान दाखिल नहीं सकी। अब मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।
मामले के अनुसार फरवरी 2016 में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चला था। उस दौरान आंदोलनकारियों ने रोहतक, सोनीपत, झज्जर सहित अन्य क्षेत्रों में सड़कें जाम कर दी थीं। 19 फरवरी को आंदोलन के दौरान ही हिंसा शुरू हो गई, जो 20 व 21 फरवरी को प्रदेश के दूसरे जिलों में भी फैल गई। इस हिंसा में न केवल दर्जनों लोग मारे गए, बल्कि बड़े पैमाने पर आगजनी हुई। इसी दौरान एक विवादित ऑडियो टेप वायरल हुआ, जिसके आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन ने सिविल लाइन थाना रोहतक में शिकायत दी कि दंगों को भड़काने में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सिंह का हाथ है। शिकायत का आधार इसी ऑडियो को बनाया गया था। ऑडियो में दूसरी जगह आंदोलन शुरू कराने की बात की जा रही है। इस ऑडियो टेप के आधार पर ही पुलिस ने प्रो. वीरेंद्र के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया था। मामले में जयदीप धनखड़ व दलाल खाप के प्रवक्ता मानसिंह दलाल के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। सामान्य स्थिति में तीन माह में पुलिस चालान दाखिल कर सकती है, लेकिन विशेष केस में जांच की कोई समय सीमा नहीं है। माना जा रहा है कि प्रोफेसर वीरेंद्र के केस को विशेष मानते हुए पुलिस इसकी जांच लंबी खींच रही है।
चालान को जनवरी में ही पुलिस ने कर लिया था तैयार
जनवरी में पुलिस चालान लेकर अदालत में पहुंची थी, लेकिन दाखिल नहीं किया गया। सवाल उठा था कि प्रोफेसर के साथ-साथ अगर पुलिस मान सिंह दलाल व जयदीप धनखड़ को आरोपी बनाने जा रही है तो तीनों को पेश होने का नोटिस भेजा जाए। इसके बाद दो तारीखें जा चुकी हैं, लेकिन पुलिस अभी तक चालान दाखिल नहीं कर सकी है।
-जेके गक्खड़, वकील बचाव पक्ष।