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टीबी के मरीजों रोज लेनी होगी दवा, हर मेडिकल स्टोर से मिलेगी फ्री

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फोटो है।
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टीबी के इलाज के लिए हर मेडिकल स्टोर से मिलेगी फ्री दवा, नियमित जांच कराई तो मिलेंगे पांच सौ रुपये
- सरकार ने बीमारी को गंभीर बताते हुए सप्ताह में तीन के बजाय रोजाना दवा लेना किया जरूरी
- पंजीकृत चिकित्सक की सलाह पर ही दी जाएगी दवा, दवा विक्रेताओं को रखना होगा रिकॉर्ड
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
टीबी के मरीजों को अब रोज दवा लेनी होगी। अब तक सप्ताह में तीन दिन ली जा रही दवा बेअसर हो गई है। सरकार ने इस बीमारी को गंभीर बताते हुए रोजाना दवा लेने के नए निर्देश जारी किए हैं। यही नहीं दवा हर मेडिकल स्टोर से फ्री मिलेगी। सरकार मेडिकल स्टोर पर दवा मुहैया कराएगी। दवा विक्रेताओं का इसका पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। यही नहीं नियमित दवा लेने, समय पर जांच कराने वाले मरीज को 500 रुपये प्रति महीना डाइट के लिए दिया जाएगा।
देश में टीबी उन्मूलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीबी कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत टीबी को नोटिफाई डिजीज घोषित करते हुए मेडिकल स्टोर पर डॉट सेंटर शुरू करने की योजना बनाई गई है। फिलहाल इच्छुक मेडिकल स्टोर पर ही दवा मुहैया कराई जाएगी। बाद में सभी दवा विक्रेताओं को टीबी दवा उपलब्ध कराई जाएगी। मरीज को स्वस्थ बनाने के लिए सरकार इलाज चलने तक हर महीने पांच सौ रुपये देगी। इससे वह अपनी डाइट पूरी कर सकता है। अक्सर रुपये नहीं होने के कारण मरीज डाइट नहीं ले पाता है।
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निजी डॉक्टरों को मिलेंगे 1000 रुपये
सरकार ने टीबी उन्मूलन को लेकर निजी डॉक्टरों को भी प्रोत्साहन देने की योजना बनाई है। इसके तहत विभाग को मरीज की सूचना देने वाले डॉक्टर को प्रति मरीज 500 रुपये दिए जाएंगे। इसके साथ ही मरीज को टीबी का सफल इलाज देने पर भी 500 रुपये दिए जाएंगे। यह सारा काम ऑन लाइन होगा। मरीज का रिकॉर्ड और डॉक्टर की पेमेंट दोनों ऑन लाइन अपडेट की जाएगी।
1800 टीबी मरीज एक साल में आ रहे सामने
टीबी दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में हर साल औसतन 1800 नए मरीज आ रहे हैं। यही नहीं लगभग इतने ही मरीज निजी अस्पतालों में भी इलाज लेते हैं। ऐसे में यह बीमारी गंभीर समस्या बन गई है। दवा पूरी नहीं लेने पर मरीज की समस्या गंभीर बनती जा रही है।
दवा विक्रेताओं को दी योजना की जानकारी
सोमवार को स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सर्जन कार्यालय में दवा विक्रेताओं के साथ बैठक की। यहां उन्हें टीबी उन्मूलन के शुरू की गई योजना से अवगत कराया गया। उन्हें मरीजों को नि:शुल्क दवा देने व दवा का रिकॉर्ड रखने की जानकारी दी गई। दवा विक्रेताओं से इस बीमारी को समाप्त करने में सहयोग की अपील की गई है। ड्रग कंट्रोल ऑफिसर डॉ. मनदीप मान ने बताया कि टीबी की दवा शेड्यूल एच-वन श्रेणी में आती हैं। मरीज के समय पर व नियमित दवा नहीं लेने के कारण इसके साइड इफेक्ट व बीमारी के प्रति रजिस्टेंस बनने का खतरा रहता है। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. केएल मलिक, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. इंदू व अन्य लोग मौजूद रहे।
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वर्जन :
सरकार ने टीबी उन्मूलन के लिए मरीजों का रोजाना दवा लेना जरूरी किया है। इसी कड़ी में दवा मेडिकल स्टोर पर नि:शुल्क दिए जाने की योजना बनाई गई है। इसका मकसद मरीज तक दवा आसानी से पहुंचाना व समय पर दवा लेते हुए कोर्स पूरा लेना सुनिश्चित करना है। इस बीमारी की पहचान अब और आसान हो गई है। इसके लिए पीजीआई में सीबी नैट मशीन लगाई गई है। यह मशीन कम कीटाणु होने पर भी बीमारी की पहचान करने में सक्षम है।
डॉ. इंदू, डिप्टी सिविल सर्जन।
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