एक्सपर्ट बोले, टैक्स कम हुआ, जीएसटी पैटर्न में ज्यादा बदनाव नहीं
हर माह सरकार को बताना होगा कितना माल खरीदा और बेचा
- छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटीआर 3बी भरना अनिवार्य
- डेढ़ करोड़ से कम टर्न ओवर वाले कारोबारियों को दोबारा भरना पड़ेगा तीन माह का जीएसटी रिटर्न
- इधर, सरकार द्वारा राहत देने के बाद व्यापारी संगठनों में श्रेय लेने की होड़
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
केंद्र सरकार द्वारा 117 वस्तुओं पर जीएसटी 28 से 18 करने से आम लोगों को तो राहत मिलेगी, लेकिन जीएसटी रिटर्न जमा कराने में राहत की उम्मीद लगाकर बैठे कारोबारियों की परेशानी ज्यादा कम नहीं हुई है।
उन्हें हर माह 20 तारीख तक जीएसटीआर 3बी जमा कराकर सरकार को बताना होगा कि उन्होंने पूरे माह कितना माल बेचा और कितना खरीदा है। एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार 3बी में भरे गए डाटा का तीन माह के फाइनल डाटा में दाखिल किए गए रिटर्न से मिलान करेगी, ताकि गड़बड़ी की संभावना न रहे।
सीएम संजय थरेजा ने बताया कि जीएसटी के अंदर बदलाव के बावजूद सालाना डेढ़ करोड़ से कम टर्नओवर वाले व्यापारियों की परेशानी कम होने की बजाए बढ़ गई है, क्योंकि वे अब तीन माह का जीएसटीआर 1 और जीएसटीआर 2 क्वार्टर में जमा कराएंगे, जबकि पहले ही जुलाई माह का रिटर्न जमा करा चुके हैं। अब पहले जमा कराया गया रिटर्न बेकार चला जाएगा। शहर के अंदर 60 प्रतिशत कारोबारियों का टर्न ओवर डेढ़ करोड़ सालाना से कम है। इससे ऊपर वाले व्यापारियों को अब मासिक रिटर्न जमा कराना है।
खरीददारी करते समय उपभोक्ता दें ध्यान
एक्सपर्ट का कहना है कि 15 नवंबर से कुल 117 वस्तुओं पर जीएसटी 28 की जगह 18 प्रतिशत लगेगी। इससे वस्तुओं के दाम कम होंगे। ऐसे में आम उपभोक्ता खरीददारी करते समय विशेष ध्यान दें। दुकानदारों से पक्का बिल लें। सरकार ने 10 प्रतिशत जीएसटी हेयर क्रीम, हेयर शैंपू, वाशिंग पाउडर, सेविंग क्रीम, च्यूइंगम, चॉकलेट, पालिस क्रीम, हाथ से बना फर्नीचर, साइकिल, रिक्शा व थ्री व्हीलर की ट्यूब, घरों की खिड़कियां व फ्रेम, फ्रीज, वाशिंग मशीन व वाहनों के कलपुर्जे शामिल हैं।
सिस्टम को अपडेट किया जाए : जांगड़ा
व्यापारियों को रिटर्न भरने में अब भी काफी परेशानी आएगी, क्योंकि जीएसटी की साइट काफी बिजी रहती है। शुक्रवार को तो पूरा दिन सर्वर डाउन रहा। सरकार को चाहिए कि सर्वर की गति तेज की जाए, ताकि समय पर व्यापारी रिटर्न फाइल कर सकें।
- अशोक जांगड़ा, टैक्स वकील
28 प्रतिशत के स्लैब को ही हटाया जाए : डंग
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष गुलशन डंग ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में करों क ी कमी करने की घोषणा करना व्यापारमंडल के प्रयासों की जीत है, लेकिन सरकार को 28 प्रतिशत जीएसटी के स्लैब को ही खत्म कर देना चाहिए। क्योंकि खुद पीएम नरेंद्र मोदी, वित्तमंत्री अरुण जेटली व केंद्रीय राजस्व सचिव हंसमुख ने माना है कि 28 प्रतिशत जीएसटी बहुत ज्यादा है और उसे खत्म करने का प्रयास चल रहा है। डंग ने कहा कि अरुण जेटली ने जल्दबाजी में 1 जुलाई 2017 को देश में जीएसटी लागू करके व्यापार व उद्योग पर अंकुश लगाने का काम किया, जबकि इसकी उन्होंने कोई तैयारी नहीं की थी। डंग ने कहा कि आज भी व्यापारियों को जीएसटी में रिटर्न भरने में बड़ी दिक्कतें आ रही है। सरकार सर्वर डाउन चलते है और जुर्माना व्यापारी को भरना पड़ता है। दस करोड़ की टर्न ओवर रखने वाले व्यापारियाें को पहले की तरह त्रिमाही रिटर्न भरने की छूट दी जाए। पेट्रोल व डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए।