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डॉक्टरों की हड़ताल, पीजीआई में हाहाकार

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक।
पीजीआई के लेबर रूम से चोरी हुए नवजात के मामले में पुलिस कार्रवाई से परेशान डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों में हाहाकार मच गया है। मंगलवार को हड़ताल के दूसरे दिन पीजीआई में सभी ऑपरेशनों को टाल दिया गया। जबकि हर रोज करीब सौ से ज्यादा ऑपरेशन होते हैं। रोज करीब दो हजार आने वाले मरीजों में से किसी को भी एडमिट नहीं किया गया। वहीं देर रात तक तक सात मरीजों की मौत हो गई, हालांकि प्रबंधन का कहना है कि किसी भी मौत हड़ताल की वजह से नहीं हुई। यह रुटीन डेथ है।
इधर, हड़ताल पर बैठे रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस जांच में हम सहयोग को तैयार हैं, लेकिन अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉक्टरों को बार-बार थाने का चक्कर कटवाना सही नहीं। कहा, पीजीआई प्रबंधन मामले में हस्तक्षेप करे और संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पूछताछ हो। जबकि कुलपति ने कहा, पुलिस का काम जांच करना है। अगर उन्हें बुलाया जाएगा तो वह भी जाएंगे। ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने मांगे न पूरा किए जाने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने की घोषणा की। बुधवार को अन्य स्थानों से डॉक्टरों को बुलाने की प्रक्रिया जारी है।
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सीनियर फैकल्टी ने संभाली कमान, व्यवस्था बेहाल
हड़ताल की वजह मरीजों की जान पर संकट बना रहा। सभी ऑपरेशन रद्द कर दिए गए। कई मरीजों को हड़ताल की बात बता कर वापस भेज दिया गया। ओपीडी, वार्ड, आपात विभाग, ऑपरेशन थियेटर हर जगह समस्या रहीं। आपात स्थिति में प्रशासन ने सीनियर फैकल्टी को व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी दे रखी है। सुबह से ही सीनियर फैकल्टी वार्डों और ऑपरेशन थियेटर में डटे रहे। संस्थान में चार सौ से ज्यादा सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर हैं। संस्थान का ज्यादातर काम रेजिडेंट डॉक्टर ही देखते हैं।

हालात संभालने के लिए मरीजाें को डिस्चार्ज
वार्डों में व्यवस्था दिखाने के लिए डॉक्टरों ने कई मरीजों को तो भर्ती ही नहीं किया और जो भर्ती थे, उन्हें हड़ताल की बात बता कर डिस्चार्ज कर दिया। कई वार्ड खाली रहे। कुछ मरीजों ने बताया कि डॉक्टरों ने फाइल पर लिखवा लिया है कि वह अपनी मर्जी से घर जाना चाहते हैं। कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पताल के लिए रवाना होना पड़ा।

डॉक्टरों को किया जा रहा तंग : ग्रेवाल
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. जंगबीर ग्रेवाल ने कहा है कि बच्चा चोरी मामले में रेजिडेंट डॉक्टरों को तंग किया जा रहा है। इसके चलते उन्होंने हड़ताल कर रखी है। डॉक्टरों को पुलिस जांच के लिए फोन पर बार-बार थाने बुलाती है और परेशान करती है। एसएचओ सैनी बार-बार उनको जेल भेजने की धमकी देते हैँ। प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि अपने जूनियर डॉक्टरों के साथ जाए। संस्थान से बच्चा चोरी हुआ है, इसका दुख हम सबको है। हम परिजनों के साथ है और हर जांच में सहयोग करेंगे। जांच के दौरान जब उनके डॉक्टर थाने में जाए तो उनके अधिकारियों को पता होना चाहिए कि वह कहां हैं। एक महिला डॉक्टर को यदि थाने पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा तो उसके साथ संस्थान को सुरक्षा तो देनी ही पडे़गी।

स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री को दी गई जानकारी : कुलपति
हेल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने कहा है कि बच्चा चोरी मामले में डीएसपी एसपी से बात हुई है। पुलिस की लगभग जांच पूरी हो चुकी है। पुलिस का काम पूछताछ करना है वह करेगी। यदि पुलिस मुझसे भी पूछताछ करेगी तो मुझे जांच में शामिल होना होगा। डॉक्टरों से बात हुई है उनका पक्ष सुना गया है। सोमवार को दिनभर और मंगलवार की सुबह साढे़ चार बजे तक इसी मुद्दे पर बात हुई है। 60 से 80 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल करना नहीं चाहते। कुछ रेजिडेंट डॉक्टर काम भी कर रहे हैं। हड़ताल को देखकर सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ से भी बात की है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री अमित झा को भी जानकारी दे दी गई है। रुटीन सर्जरी को टाल दिया गया है। स्त्री रोग विभाग में सामान्य मरीजों को नहीं लिया जा रहा है। कुलपति ने बताया कि वार्ड दो में प्रतिदिन 40 से 50 केस होते हैं। जबकि एमसीआई के नियमानुसार सप्ताह में 42 डिलीवरी को ही बेहतर माना जाता है। प्रतिदिन अकेले दस सिजेरियन डिलीवरी ही लेबर रूम में कराई जाती है। अधिकारी ने बताया कि संस्थान में प्रतिदिन की ओपीडी संख्या 8000, बेड 2000 और आपात विभाग की क्षमता 1400 मरीज प्रतिदिन की है। ऐसी स्थिति में उन पर वर्क लोड अधिक रहता है।

आज से कुलपति कार्यालय के बाहर परिजन देंगे धरना
लेबर रूम से चोरी हुए बच्चे के चाचा पंकज धींगड़ा ने बताया कि वह बुधवार से कुलपति कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेेंगे। जब कुलपति ने लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए कह रहे हैं तो डॉक्टर पीछे क्यों हट रहे हैं। इस मामले में अभी तक किसी को सस्पेंड नहीं किया गया है। एक बार भी सरकार का कोई आदमी उनके परिवार से मिलने तक नहीं आया। पीजीआईएमएस की लापरवाही के चलते वह दोनों भाई बेरोजगार हो गए हैं और बच्चा खो दिया है वह अलग से।

नहीं होने देंगे किसी को समस्या : डीएमएस
डीएमएस डॉ. संदीप ने बताया कि बुधवार को 21 डॉक्टर सीएमओ ऑफिस से और हरियाणा गवर्नमेंट की ओर से 50 और डॉक्टर आ जाएंगे। आपात विभाग में कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। इसके अलावा सारा कार्य सही रूप से चलेगा। स्थिति कंट्रोल में है। वहीं चर्चा है कि आरडीए के चुनाव जल्द होने हैं, इसलिए यहां दो ग्रुप काम कर रहे हैं।

एस्मा के बावजूद हड़ताल पर अधिकारी खामोश
एस्मा लगे होने के बावजूद हड़ताल किए जाने पर कुलपति ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को हड़ताल जानकारी दे दी गई है। वहीं रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. ग्रेवाल का कहना है कि उनकी समस्या जायज है। प्रशासन उनकी समस्या का समाधान कर दे तो हड़ताल खत्म कर दी जाएगी।

पहले दिन में फिर रात में मरीजों का हंगामा
उपचार न मिलने के चलते कई मरीजाें के परिजनों ने दोपहर करीब डेढ़ बजे 1:36 बजे आपातकालीन विभाग के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि अंदर न तो डॉक्टर देख रहे न कोई जांच हो रही। कार्ड भी बनाने के लिए कोई तैयार नहीं। वहीं कई जच्चा को भी वापस भेज दिया। वहीं देर रात करीब 12 बजे एक बार फिर मरीजों और उनके परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। मरीजों के परिजनों का कहना है कि हड़ताल के चलते मरीजों को देखा नहीं जा रहा है। इमरजेंसी में डॉक्टर तो हैं, मरीजों को कोई देखने को तैयार नहीं है। इमरजेंसी में मौजूद मरीजों के परिजनों ने बताया कि देर रात सड़क दुर्घटना के तीन मरीज आए। उन्हें किसी डॉक्टर ने नहीं देखा, जिससे एक की मौत हो गई।
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बोले सांसद
पहले पीजीआईएमएस में दूसरे प्रदेश के मरीज आते थे। अब पीजीआई अपने मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भेज रहा है। यह भाजपा सरकार की नाकामी का नतीजा है। मेरा जन्म खुद पीजीआई में हुआ है। लेकिन आज स्थिति यह कर दी गई है कि यहां कोई आने को तैयार नहीं है।
- दीपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद
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