अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआई में चल रही हड़ताल से जहां मरीज परेशान हैं, वहीं डॉक्टर भी इसके पक्ष में नहीं हैं। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि किसी मरीज को परेशानी हो, यह कोई डॉक्टर नहीं चाहेगा। आरोप है कि पुलिस बर्ताव और जांच के नाम पर डॉक्टरों को होने वाली परेशानी से पीजीआई प्रबंधन कोई सरोकार नहीं रख रहा। ऐसे में हड़ताल ही विकल्प है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा चोरी होना गलत है, इसकी जांच भी होनी चाहिए और जो अपराधी है उस पर कड़ी कार्रवाई हो। डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस पूछताछ में हम सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन बार-बार थाने बुलाना गलत है। काम को छोड़कर थाने जाना पड़ता है और फिर भी पुलिस अभद्रता करेगी तो इसे सहन नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक पीजीआई प्रबंधन मांगों को नहीं मानती है तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
मंगलवार को सुबह नौ बजे पीजीआई परिसर स्थित विजय पार्क में रेजिडेंट डॉक्टर एकजुट हुए। सभी ने बाल रोग विभाग की डॉक्टर को पुलिस थाने में बुलाने और अभद्रता करने का विरोध किया। करीब 11 बजे रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. जंगवीर ग्रेवाल अन्य पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने सभी की बात सुनी। साढ़े ग्यारह बजे एसोसिएशन के पदाधिकारी कुलपति से मिलने के लिए कार्यालय पहुंचे और वहां डॉक्टरों की मांगों पर बातचीत की। वापस आकर उन्होंने करीब सवा घंटे डॉक्टरों के साथ बैठक की। इस दौरान कुछ डॉक्टरों में कुछ मांगों को लेकर बहस भी हुई। वहीं विजय पार्क में शाम पांच बजे तक रेजिडेंट डॉक्टर्स बैठे रहे।
मांगें गलत नहीं, संस्थान मान ले, हड़ताल खत्म कर देंगे
बैठक के दौरान डॉक्टरों ने कहा, बच्चा चोरी हुआ है, वह भी समझते हैं। यह गलत है, लेकिन किसी डॉक्टर को बच्चा चोरी मामले में उलझाना सही नहीं है। उनकी गलती क्लीनिकल हो सकती है न कि प्रबंधन संबंधी। एसआईटी प्रभारी डीएसपी डॉ. रविंद्र कुमार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी रेजिडेंट डॉक्टर हिना फातिमा को जांच के नाम पर अभद्रता की गई। इससे डॉक्टरों में रोष है। हम जांच के पक्ष में हैं। संस्थान की बदनामी नहीं चाहते हैं। अगर प्रबंधन भी हमारा साथ देने को तैयार हो तो हम हड़ताल खत्म कर देंगे।
आरडीए की प्रमुख मांग
1. पुलिस जांच के दौरान डॉक्टर के साथ संस्थान के मेडिकल लीगल एडवाइजर मौजूद रहे।
2. जांच के लिए यदि किसी डॉक्टर को थाने में बुलाया जाता है तो साथ में वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी को भेजा जाए। यदि डॉक्टर पुरुष है तो पुरुष सुरक्षा गार्ड और महिला डॉक्टर है तो महिला सुरक्षा गार्ड।
3. पुलिस प्रशासन अपनी जांच प्रक्रिया चिकित्सा अधीक्षक के सुपरविजन में करे और जांच एमएस कार्यालय में हो।
4. पीजीआई प्रबंधन जांच में पूर्ण सहयोग करें और डॉक्टरों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराए, ताकी उनके साथ कोई नाइंसाफी न हो।