एग्रो मॉल के दुकान मालिकों ने बनाई रणनीति, अमित शाह को ज्ञापन सौंपेेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। एमडीयू के सामने सेक्टर-14 स्थित एग्रो मॉल में बनीं दुकानों के खरीददार भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आगामी दौरे पर उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे। दुकान मालिकों का कहना है कि उन्हें सरकार ने ठगा है। मॉल बनते समय जो सपने उन्हें दिखाए गए थे, उनमें से कोई भी पूरा नहीं हो सका। उनकी खरीदी सभी दुकानें चार साल से खाली पड़ी हैं। इससे पूंजी खराब हो गई है। भाजपा अध्यक्ष को शिकायत करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए कई दुकान मालिकों ने रविवार को मॉल में बैठक की।
एग्रो मॉल शॉप एसोसिएशन के प्रधान उदय सिंह फौगाट ने बताया कि 2012 में सरकार ने 100 करोड़ की लागत से इस मॉल को तैयार किया। इसमें कुल 283 दुकानें निकाली गईं। मार्च 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने एग्रो मॉल का उद्घाटन करते हुए कई सपने दिखाए। हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के तहत बनाए मॉल की दुकानें बेचने के लिए सरकार ने विज्ञापनों में बताया कि यहां मल्टीप्लेक्स और एमएनसी कंपनियों के दफ्तर खुलने वाले हैं।
कहा गया कि 40 प्रतिशत दुकानें सरकार खुद खोलेगी। इस तरह की बातें सुनकर लोगों ने दुकानों के लिए महंगी बोलियां लगाकर बुक करा ली।
प्रधान उदय सिंह ने बताया कि पहली बोली में 32 दुकानें बिक र्गईं। इसके बाद की कई अन्य बोलियों से कुल 78 दुकानें बिकीं। इतने समय में मॉल में कोई भी विकास न देखकर लोगों ने हाथ खींचने शुरू कर दिए और फिर बोली में कोई खरीददार नहीं आया। मॉल की तीसरी मंजिल पर फूड कोर्ट खोले दुकान मालिक ने बताया कि पूरे मॉल में तीन-चार प्राइवेट इंस्टीट्यूट और एक सर्व ग्रामीण बैंक ही है। इसके अलावा सभी दुकानें बंद पड़ी हैं। यहां इक्का-दुक्का ग्राहक ही आता है। उनकी दुकान के अंदर पानी, सीवरेज सहित कोई भी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। काम नहीं चलने से वह इसे बंद करने के विचार में है।
देव कॉलोनी निवासी दुकान मालिक संजय गिल ने बताया कि उन्होंने दो करोड़ की लागत की 98 स्क्वेयर फीट की दुकान के लिए 50 लाख रुपये भरे हुए हैं। मॉल में कोई भी प्रगति नहीं देखकर आगे की रकम भरने का सवाल ही नहीं होता। अभी तो 50 लाख ही दांव पर हैं। इसके बाद भी रुपये दिए तो वह भी फंस जाएंगे। ओल्ड हाऊसिंग बोर्ड निवासी रोहित ने बताया कि उन्होंने 27 गज की 72 लाख कीमत की दुकान के लिए 18 लाख रुपये भर दिए थे। मॉल की डेवलपमेंट होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। उनकी मेहनत का रुपया बर्बाद हो रहा है।
डेवलपमेंट के नाम पर जीरो, किस्त भरने के आते हैं मेसेज
दुकान मालिकों ने बताया कि उन्हें आगे की किस्त भरने और दुकान के बिल के लिए मेसेज आते रहते हैं। सरकार की ओर से यहां कोई प्रगति देखने को नहीं मिल रही। अगर यहां कोई डेवलपमेंट होगा ही नहीं तो वह और रुपया भी क्यों दांव पर लगाएं।