अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। मंगलवार को शहर के साथ लगते मीरपुर गांव में सक्षम अध्यापकों ने पूरे जिले के सक्षम होने पर सक्षम अध्यापक सम्मान समारोह का आयोजन किया। खास बात यह है कि इस कार्यक्रम में दोनों जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी पहुंच गए। इस कार्यक्रम में जिला शिक्षा विभाग के तमाम अधिकारी पहुंचे हुए थे।
कार्यक्रम में पहले पुराने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संत कुमार बिश्नोई पहुंच गए। अभी वे कार्यक्रम देख ही रहे थे कि नए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी धनपत राम भी पहुंच गए। तब दोनों जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को कार्यक्रम में देखकर आयोजकों में असमंजस की स्थिति बन गई कि अब किसे जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कहकर संबोधित किया जाए और किसे सम्मानित किया जाए। तब बीच का रास्ता निकालते हुए आयोजकों ने मंच से दोनों को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कहकर संबोधित किया और दोनों को ही बारी-बारी से सम्मानित किया। पुराने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी मंगलवार को डीईओ कार्यालय में बैठे रहे। जबकि नए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अपने नए कार्यालय में बैठे रहे।
डीसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मांगा मार्गदर्शन
दूसरी ओर इस मामले को लेकर उपयुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी प्रभजोत सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस मामले में मार्गदर्शन मांगा है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा है कि धनपत राम ने आचार संहिता लगने के बाद ज्वाइनिंग की है। यह उचित है या फिर आचार संहिता का उल्लंघन। क्योंकि संत कुमार बिश्नोई ने इस मामले में उन्हें पत्र देकर इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है।
ये है मामला
रविवार को लोकसभा चुनावों को लेकर आचार संहिता लगने के बाद सोमवार को फतेहाबाद के डिप्टी डीईओ धनपत राम पदोन्नत होकर सिरसा में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बन कर आ गए। कुछ दिनों पहले सिरसा के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संत राम बिश्नोई का तबादला डाइट मोहड़ा जिला अंबाला में हो गया था। लेकिन वे रिलीव नहीं हुए थे। वे भी सिरसा में ही अभी पदभार संभाले हुए थे। सोमवार को आम दिनों की तरह से संत कुमार बिश्नोई जिला मौलिक शिक्षा कार्यालय में बैठे हुए थे। कुछ समय के लिए वे जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में गए तो फतेहाबाद से पदोन्नत होकर आए धनपत राम जिला मौलिक शिक्षा कार्यालय में गए और कुर्सी पर बैठ गए। जब जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संत कुमार बिश्नोई वापस आए तो वे कार्यालय में बैठे हुए थे। इसके बाद संत कुमार बिश्नोई वापस डीईओ कार्यालय में आ गए। उन्होंने डीसी से इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया। वहीं दूसरी ओर दोपहर को धनपत राम भी डीसी से मिले और अपना पक्ष रखा।