अभी भी कोख में हो रहा है बेटियों का कत्ल!
नसीब सैनी
कैथल। दो साल पहले पीएनडीटी एक्ट सहित एमटीपी एक्ट के तहत कैथल ही नहीं आस-पास के जिलों, यूपी व पंजाब में रेड कर सबसे ज्यादा केस दर्ज करवाने वाले कैथल जिले में अभी भी बेटियों का कोख में कत्ल रुक नहीं पाया है। एक समय में प्रति एक हजार लड़कों के पीछे 1003 तक अनुपात पहुंच गया था। लेकिन पिछले करीब छह माह से आ रही लिंगानुपात की गिरावट ने स्वास्थ्य विभाग के भी होश उड़ा दिए हैं।
जिले में पूर्व में लिंगानुपात 881 के आस-पास था। स्वास्थ्य विभाग ने लड़का पैदा होने की दवा देने वालों, कोख में बेटी का कत्ल करने वालों सहित अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड करने वालों के खिलाफ शिकंजा कसा तो परिणाम सकारात्मक होने शुरू हो गए थे। नतीजा यह हो गया था कि फरवरी 2017 में जिले का लिंगानुपात औसत बढ़कर 1000 लड़कों के पीछे 1003 हो गया था। लेकिन इसके बाद से इसमें कुछ ज्यादा सुधार नहीं हुआ है।
हरियाणा में सर्वाधिक रेड व केस दर्ज करवाने वाला जिला है कैथल : पीएनडीटी एक्ट एवं एमटीपी एक्ट के तहत सबसे ज्यादा रेड करने वाला एवं सबसे ज्यादा केस दर्ज करवाने वाला कैथल जिला है। यहां पिछले दो सालों में पीएनडीटी एक्ट के तहत 23 केस दर्ज हुए। जिसमें से 3 में सजा भी हो चुकी है। एमटीपी एक्ट के तहत 14 केस दर्ज हुए हैं।
सुधार के बाद आई गिरावट : जनवरी 2016 में जिले में लिंगानुपात का औसत 913 था, जो सुधरकर फरवरी 2017 तक 1003 तक पहुंच गया था। लेकिन अब इसमें भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि कहीं न कहीं लोग सिस्टम का फायदा उठाकर गर्भ में ही बेटियों की अभी भी हत्या कर रहे हैं। लेकिन उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।
अगस्त में 824 पहुंचा लिंगानुपात : अगस्त 2017 में लिंगानुपात गिरकर 824 पर पहुंच गया है। हालांकि इस साल का अभी तक का औसत 879 बताया जा रहा है। लेकिन सुधार के बाद इसमें बड़ी गिरावट भी चिंता का विषय है।
यूपी में चल रहा है इस समय लिंग जांच का गोरख धंधा : स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंजाब के बाद यूपी में भी रेड की गई हैं। यूपी में अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड करने का धंधा बड़े स्तर पर फल-फूल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई रेड भी की हैं। लेकिन कई मामले पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली के कारण अंजाम तक नहीं पहुंच पाए। महिलाओं को यूपी ले जाकर अल्ट्रासाउंड करवाने वाले युवक आज भी खुले घूम रहे हैं।
ये है जिले में लिंगानुपात की पिछले साल की तुलना में स्थिति
2016 2017
जनवरी 913 955
फरवरी 889 1003
मार्च 885 864
अप्रैल 855 821
मई 966 837
जून 781 837
जुलाई 948 880
अगस्त 857 824
सितंबर 915
अक्टूबर 872
नवंबर 893
दिसंबर 896
औसत 879
सरकार के निर्देशानुसार विभाग द्वारा नियमित तौर पर रेड की जा रही है। पुलिस में दर्ज करवाए गए मामलों की पैरवी की जा रही है। फील्ड स्टाफ से लेकर इस मामले से जुड़े सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को अलर्ट किया गया है। जिले में काफी सारे लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाए गए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि शीघ्र ही लिंगानुपात का अंतर कम हो और यह अच्छी औसत में आए। आम जनता से अपील है कि वे बेटा-बेटी में फर्क न करें। ताकि समाज की सोच बदले।
डा. अशोक, सीएमओ, कैथल।
पीएनडीटी एक्ट के क्रियान्वयन प्रभारी डा. नीलम कक्कड़ के अनुसार जिले में लड़का होने की दवा देने वालों, लिंग जांच करवाने वालों के खिलाफ सूचना मिलने पर रेड करते हुए केस दर्ज करवाया जा रहा है। कई मामलों में सजा भी हुई है। लिंगानुपात में सुधार के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। आगे भी ये प्रयास गंभीरता से किए जा रहे हैं। इसके अलावा फील्ड स्टाफ से लेकर विभाग में बड़े स्तर पर भी लिंगानुपात के कम होने के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है।
अक्टूबर माह में चलेगा लिंगानुपात सुधारने के लिए विशेष अभियान
कैथल। जिले में लिंगानुपात को सुधारने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए अक्टूबर माह में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के बारे में महिला बाल विकास विभाग विभिन्न कार्यक्रम व गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जागरूक करेगा। डीसी सुनीता वर्मा ने बताया कि 9 से 14 अक्टूबर तक बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सप्ताह मनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त 11 अक्टूबर को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाएगा, जिसके तहत लिंगानुपात सुधार के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। यह एक ऐसा मंच होगा, जो कन्याओं को दैनिक जीवन में आने वाली चुुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सुझाव दिए जाएंगे। जिला स्तर पर इन कार्यक्रमों में कॉलेज, स्कूल के बच्चों को आमंत्रित किया जाएगा तथा स्थानीय सांसद व विधायक को इन कार्यक्रमों में बुलाया जाएगा। इस अभियान का प्रचारित करने के लिए सोशल मीडिया को भी प्रयोग में लाया जाएगा।