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सांपला में एक मटके पानी के लिए धक्का मुक्की

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जलघर के तालाब सूखे, एक मटका पानी के लिए हो रही धक्का-मुक्की
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फोटो---
अमर उजाला ब्यूरो
सांपला। गर्मी का मौसम, ऊपर से चिलचिलाती धूप। जहां देखो वहां पानी की विकट समस्या। गांव ही नहीं, कस्बे के भी हालात खराब हैं। लोगों की प्यास बुझाने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने कई वार्डों में पानी के टैंकर भेजने शुरू कर दिए हैं। टैंकर गली में पहुंचते ही पानी भरने वालों की धक्का-मुक्की हो रही है। पीने का पानी किसी तरह मिल भी जाता है, पर नहाने और कपड़े धोने की समस्या गंभीर है।
गांव के जलघरों में बनाए गए सभी तालाबों का पानी खत्म हो चुका है। किसी भी गांव के तालाब में पानी नहीं बचा। ऐसे में पब्लिक हेल्थ विभाग ट्यूबवेलों के सहारे काम चला रहा है। अटायल, पाकस्मा, भैसरू, हसनगढ़, इस्माइला, गांधरा गांव में बच्चे-बुजुर्ग से लेकर महिलाएं तक, कोई सिर पर तो कोई रिक्शा या बाइक, साइकिल, बोगी में बर्तन रख कर पानी भर कर लाते देखे जा सकते हैं।
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कस्बे के छह वार्डों में गहरा सकंट
कस्बे के भी जलघरों के तालाबों का पानी खत्म हो चुका है। आधा दर्जन वार्डों में पानी पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। लोगों को खरीद कर पानी पीना पड़ रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग पानी के टैंकर भेज रहा है, यहां महिलाओं की भीड़ जुट जाती है और धक्का-मुक्की हो जाती है। रोशनी, सोनिया, कविता, सोनम ने बताया कि शुक्रवार को टैंकर पानी लेकर वार्ड सात वाली गली में पहुंचा तो युवा टैंकर पर चढ़ गए तो कुछ महिलाएं पीछे पाइप से पानी भरने के लिए धक्का मुक्की करती रहीं। वार्ड 12, 13, 14 ,व 15 की महिलाएं तो हाईवे क्रॉस कर जलघर के गेट के बाहर लगे हैंड पंप से भरकर सिर पर पानी ला रही हैं। पानी के चक्कर में जान का भी खतरा रहता है।
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क्या कहते अधिकारी- जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ एनके गर्ग का कहना है कि तालाबों का पानी खत्म हो चुका है। लेकिन ट्यूबवेलों से पानी की सप्लाई की जा रही है। तीन दिन के बाद सिंचाई विभाग ने नहरों में पानी छोड़ने की बात कही है। उसके बाद संकट खत्म हो सकेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे व्यर्थ में पानी न बहाएं।
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