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एलिवेटेड रेलवे ट्रैक और आरओबी के दस्तावेज जमा करने को 10 अप्रैल तक का वक्त

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एलिवेटेड रेलवे ट्रैक और आरओबी के दस्तावेज जमा करने को 10 अप्रैल तक का वक्त
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सोमवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए मांगा गया वक्त
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
गोहाना-पानीपत रेल लाइन के लिए बनाए जा रहे एलिवेटेड रेल ट्रैक जहां एक ओर शिलान्यास हो गया वहीं इसके विरोध में कोर्ट में में पड़ी याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को डॉक्यूमेंट जमा कराने के लिए 10 अप्रैल तक का वक्त दिया है।
एलिवेटेड रेल ट्रैक पर सरकार का कहना है कि इससे गांधी कैंप क्षेत्र के साथ ही पूरे शहर को लाभ होगा, वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार 315 करोड़ रुपये पानी में बहा रही है। याचिकाकर्ताओं ने एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के औचित्य पर सवाल उठाते हुए इसी वर्ष फरवरी में कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार से इस योजना से संबंधित कागज पेश करने की मांग की थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।
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याचिकाकर्ताओं एडवोकेट करन सिंह और नवीन सिंघल का आरोप है कि एलिवेटेड रेलवे ट्रैक को लेकर नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। इस रेलवे लाइन पर पहले आरओबी को मंजूरी दी गई थी, जिसकी मंजूरी से से संबंधित सभी ड्राइंग, दस्तावेज, इंस्पेक्शन एवं सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में याचिका लगाकर सरकार से मांगी गई है। इसके साथ ही एलिवेटेड रेलवे ट्रैक से संबंधित सर्वे रिपोर्ट, पर्यावरण अनापत्ति प्रमाणपत्र, एनवायरनमेंट इंपैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट, ट्रैफिक पर एक्सपर्ट की रिपोर्ट के साथ ही आरओबी को लेकर स्वीकार किए गए टेंडर, आरओबी एवं एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण से पहले योजना बनाने में किए गए खर्च एवं अर्बन प्लानिंग रिपोर्ट की जानकारी मांगी गई है। याचिकाकर्ता करन सिंह ने बताया कि डॉक्यूमेंट देने के लिए कोर्ट की ओर से सरकार को 10 अप्रैल तक वक्त दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार डॉक्यूमेंट देने से बच रही है, सरकार को सोमवार की सुनवाई के दौरान ही डॉक्यूमेंट पेश कर देने थे। उन्होेंने बताया कि वर्ष 2007-08 में इसी रेलवे लाइन पर दो रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) बनाने की योजना 54 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब यहां एलिवेटेड रेलवे ट्रैक बनाकर 315 करोड़ रुपये बेवजह खर्च किए जा रहे हैं। उधर, सरकार की मानें तो एलिवेटेड रोड बनने से भूमि अधिग्रहण नहीं करना पड़ा, इससे किसानों की जमीन किसानों के पास ही रहीं। इसके साथ ही रेलवे लाइन के दोनों ओर दुकानदारों को इसका फायदा मिलेगा।
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