निम्न गुणवत्ता का पानी कर सकता है सेहत खराब
चरखी दादरी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर के विभिन्न भागों से लिए गए और लैब में भेजे पेयजल सप्लाई के सैंपल फेल पाए गए हैं। विभाग की ओर से पानी का बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट करवाया गया है। पानी में क्लोरीन की मात्रा कम मिल रही है। क्लोरीन की कमी के चलते डायरिया, हैजा, उल्टी-दस्त की शिकायत अधिक बढ़ जाती है।
शहर में आठ बूस्टिंग स्टेशन हैं इनके जरिए पूरे शहर में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। यह बूस्टिंग स्टेशन एरिया वाइज शहर के अलग अलग भागों में बने हैं। हीरा चौक बूस्टिंग, सरगम बूस्टिंग, रोजगार्डन के समीप बना बूस्टिंग व दशनामी अखाड़ा के पास बना बूस्टिंग सबसे पुराने हैं। बाकी बूस्टिंग नई आबादी के अनुरूप बनते गए। प्रतिदिन करीब 75 हजार लोग पानी का इस्तेमाल करते हैं इन बूस्टिंग स्टेशनों के जरिए की जाने वाली आपूर्ति से रोजाना करीब 75 हजार लोग इस पानी का विभिन्न रूपों में इस्तेमाल करते हैं। इन बूस्टिंग स्टेशनों में रोजाना 75 लाख लीटर पानी की सप्लाई की जाती है। तत्पश्चात बूस्टिंग के जरिए कालोनियों में पानी की आपूर्ति कर जाती है। रात के समय इन बूस्टिंग स्टेशनों मेें मेन जलघर से पानी डाला जाता है।
विभाग टीम ने गत 13 जुलाई को शहर के इन बूस्टिंग स्टेशनों का दौरा कर पानी की गुणवत्ता की जांच की थी। इस दौरान पानी में क्लोरीन की जांच की गई थी। इसकी जांच ओटी टेस्ट के जरिए की गई थी। जांच के दौरान शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों से सैंपल लिए गए थे। जांच के बाद इन सभी के पानी के सैंपल फेेल पाए गए थे। पानी में क्लोरीन की मात्रा नहीं मिली।
18 जुलाई को भेजे भिवानी लैब में सैंपल
तत्पश्चात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 18 जुलाई को पूरे शहर से चार सैंपल भिवानी स्थित बंसीलाल अस्पताल में जांच के लिए भिजवाए। अब इन सैंपलों की रिपोर्ट आ गई है। स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षक जगदीश ने बताया कि विभाग ने चार सैंपल भिवानी लैब में जांच के लिए भेजे थे अब इनकी रिपोर्ट मिल चुकी है। रिपोर्ट में यह सैंपल फेल पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह सैंपल शहर के रोजगार्डन बूस्टिंग, घिकाड़ा रोड बूस्टिंग, हीरा चौक व बाल्मीकि बस्ती से लिए गए थे। इस पानी का बैक्ट्रोलोजिकल टेस्ट करवाया गया है। निरीक्षक ने बताया कि इस रिपोर्ट की प्रति डीसी व जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता को भी भेजी गई है। निरीक्षक जगदीश ने बताया कि शहर के पानी में इस समय क्लोरिन की भारी मात्रा में कमी बनी हुई है। इसकी वजह से से डायरिया, हैजा, उल्टी व दस्ती की शिकायत हो जाती है। ज्यादा बढ़ जाने पर व्यक्ति की मौत तक भी हो जाती है।
बाक्स:::जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेल का पानी मिलाकर करता है आपूर्ति
जनस्वास्थ्य विभाग लंबे समय से शहर में जलघर के पानी में ट्यूबवेल का पानी मिलाकर आपूर्ति कर रहा है। विभाग ने जलघर परिसर में ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं । जब भी नहरी पानी की कमी होती है तो इन ट्यूबवेल का पानी मिलाया जाता है। इस समय भी ट्यूबवेल का पानी मिलाकर आपूर्ति हो रही है। ट्यूबवेेल का पानी लवणीय है। इसमें काफी खारापन भी है। विभाग ने चंपापुरी व रामनगर जलघरों में करीब एक दर्जन ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं। लंबे समय तक ट्यूबवेल से जल दोहन पर इसके पानी की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। वैसे भी इन बूस्टिंग स्टेशनों की नियमित रूप से सफाई नहीं हो रही है। बूस्टिंग स्टेशनों में बरसाती पानी का भी भराव हो जाता है। पेड़ों के पत्ते, मिटटी व विभिन्न प्रकार के जीव मृत अवस्था में भी गिर जाते हैं। कई बार ढक्कन भी खुले पड़े रहते हैं।
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शहर के पीने के पानी का बैक्ट्रोलोजिकल टेस्ट करवाया गया है। भिवानी लैब में जांच के बाद यह सैंपल फेल पाए गए हैं।
निरीक्षक जगदीश, स्वास्थ्य विभाग