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बिजली निगम की लापरवाही ने ली दो जान

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। बिजली निगम की लापरवाही ने दो ग्रामीणों की जान ले दी। भगवतीपुर गांव में आठ दिन से टूटी पड़ी बिजली की लाइन की विभाग ने सुध नहीं ली। शनिवार सुबह खेतों में गई बुजुर्ग महिला इन्हीं तारों की चपेट में आ गई। महिला की मौत के बाद ग्रामीणों ने रोहतक-जींद मार्ग को जाम कर दिया। डीएसपी और एक्सईएन ने ग्रामीणों को कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद ग्रामीण सड़क से हटे। वहीं, गांव भैणी सुरजन में तीन माह से टूटे पड़े बिजली के तार कर्मचारियों ने इसलिए नहीं जोड़े क्योंकि किसान ने पैसे नहीं दिए। इन्हीं तारों की चपेट में आकर युवा किसान की शनिवार सुबह मौत हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-10 पर शव रखकर जाम लगा दिया। तीन बिजली कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद ही ग्रामीणों ने जाम खोला

पांच दिन से टूटी लाइन नहीं जोड़ी, करंट से महिला की मौत
रोहतक। बारिश और तेज हवा के चलते आठ दिन पहले भगवतीपुर गांव के खेतों में रोहतक से लाखनमाजरा जा रही 33 हजार किलोवाट की लाइन के खंभे उखड़ गए। निगम की यह लापरवाही उसकी शनिवार सुबह लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने रोहतक-जींद मार्ग जाम कर दिया। मामले की सूचना मिलने पर बिजली निगम के अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया।
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ग्रामीणों ने बताया कि भगवतीपुर गांव की बुजुर्ग महिला 55 वर्षीय विधा देवी सुबह अपने पोते के साथ खेतों में गई थी। वह खेत के नजदीक टूटी पड़ी 33 हजार केवी की लाइन की चपेट में आ गई। करंट लगने से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस बिजली लाइन की चपेट में आने से एक नील गाय की भी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ रोष व्यक्त किया और रोहतक-जींद मार्ग को जाम कर दिया। महिला का पति सज्जन सिंह फौज से रिटायर्ड है वहीं एक बेटा फौज में है। दूसरा बेटा खेती बाड़ी का काम करता है।

निगम के अधिकारियों ने नहीं ली सुध
ग्रामीण नवीन ढुल और मृतक के परिजनों का कहना था कि 16 जून को बरसात और आंधी आई थी। इसमें खंभे टूटने से तार खेतों में गिर गए थे। उन्होंने बिजली विभाग को सूचना दी लेकिन कई दिन बाद भी बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इसे ठीक नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब तक मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, वह जाम नहीं खोलेंगे। मामला बढ़ता देख डीएसपी रोहताश कुमार टीम सहित मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया। साथ ही पीड़ित परिवार के लोगों के बयान दर्ज किये। करीब एक घंटे तक ग्रामीणों ने जाम लगाकर रखा। आरोपियों पर कार्रवाई की आश्वासन मिलने के बाद जाम खोला।

एक्सईएन ने मानी गलती, कार्रवाई का आश्वासन
मौके पर पहुंचे बिजली विभाग के अधिकारी जेएस नाहरा का कहना है कि मामले में कहीं न कहीं विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही है। खेत में पानी होने की वजह से यह बिजली का खंभा गिर गया और इसमें बिजली चल रही थी। पूरे मामले की जांच की जाएगी। डीएसपी रोहताश ने बताया कि शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
निगम की डिवीजन नंबर एक की सब अर्बन डिवीजन है, जिसके एरिया में खोखराकोट पावर हाउस से लाखनमाजरा पावर हाउस में 33 हजार केवी लाइन जाती है। पांच दिन पहले खंभे गिर गए थे। प्राथमिक जांच में डिवीजन के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ रही है, जिसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
- एसके बंसल, एसई बिजली निगम।

तीन माह पहले टूटे तार नहीं किए ठीक, किसान की मौत

लाखनमाजरा। बिजली का करंट लगने से महम के गांव भैणी सुरजन निवासी किसान की मौत हो गई। किसान कपास के खेत में काम करने गया था। यहां 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आ गया। हादसे से आक्रोशित ग्रामीणोें ने हाईवे-10 पर किसान का शव रखकर जाम लगा दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तीन माह से तार टूटे पड़े हैं लेकिन बिना पैसे लिए बिजली कर्मचारी इन्हें जोड़ ही नहीं रहे। इसी कारण हादसा हो गया। थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया। तीन बिजली कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद ही ग्रामीण माने और उन्हाेंने जाम खोला।
जानकारी के अनुसार प्रदीप पुत्र सतनारायण शनिवार सुबह खेतों में काम करने गया था। यहां बिजली की हाई टेंशन लाइन के तार प्रदीप के गले से टकरा गया। प्रदीप जब तक कुछ समझ पाता वह करंट से झुलस गया। उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। कुछ देर बाद प्रदीप के चाचा रमेश खेत में पहुंचे तो ट्यूबवैल के पास बने कमरे के पास प्रदीप का शव पड़ा देखा। प्रदीप की मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण खेत की ओर दौड़ पड़े। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंची। हालांकि कई बार फोन करने के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। एसआई राजकुमार और रामनिवास ने बताया कि मौके पर बिजली विभाग की लापरवाही दी दिखाई दी। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली की लाइन तीन माह पहले टूट गई थी। बार-बार लिखित और मौखिक शिकायत देने के बाद भी बिजली विभाग के कर्मचारियों ने टूटे तार को ठीक नहीं किया। अर्थिंग टूटने से किसान प्रदीप की जान चली गई। प्रदीप सतनारायण का इकलौता बेटा था। प्रदीप को एक बेटा और एक बेटी है। पोस्टमार्टम के बाद प्रदीप का शाम को दाह संस्कार कर दिया गया।

बिजली कर्मचारी तार ठीक करने के लिए मांगते हैं रिश्वत
परिजनों ने बताया कि एक सप्ताह पहले भी बिजली विभाग में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदीप के चाचा रमेश और पूर्व सरपंच रामनिवास ने बताया कि 1500 रुपये देकर इसी लाइन के एक एकड़ के तार कडे़ करवाए थे। टूटे तार को जोड़ने के लिए बई बार बोला। लेकिन बिजली विभाग के फोरमैन बलजीत, विजयपाल और विजय ने दो हजार रुपये मांगे। जांच अधिकारी रामनिवास ने बताया कि बिजली कर्मचारियों की लापरवाही के चलते किसान की मौत हुई है। फोनमैन बलजीत, विजयपाल और विजय के खिलाफ मृतक के चचेरे भाई के बयान पर केस दर्ज लिया गया है। मौके पर थाना प्रभारी उमेद सिंह और डीएसपी रोहतास सिंह पहुंचे।
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शव हाईवे पर रख लगाया जाम
जब काफी देर इंतजार करने के बाद भी बिजली निगम के अधिकारी नहीं पहुंचे तो ग्रामीण उग्र हो गए। उन्होंने शव को महम बाईपास के पास हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया। थाना प्रभारी उमेद सिंह ने बिजली विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद बिजली विभाग के एक्सईएन सुखबीर सिंह और तहसीलदार रविंद्र मलिक पहुंचे। उन्हाेंने ग्रामीणों को एसडीओ बिजली विभाग सहित दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया।
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