फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्रामीणों को इस माह से दोगुना भरना पड़ेगा पेयजल बिल

विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रामीणों को इस माह से दोगुना भरना पड़ेगा पेयजल बिल
विज्ञापन

चरखी दादरी।
अब ग्रामीण पेयजल उपभोक्ताओं को 20 की बजाय 40 रुपये प्रति माह पेयजल बिल चुकाना होगा। नए रेट एक जून से प्रभावी हो गए हैं। हैड ऑफिस से जनस्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में पत्र मिल चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में 19 हजार पेयजल कनेक्शन हैं। सरकार ग्रामीण पेयजल उपभोक्ताओं के मार्च 2015 तक के पानी के बिल पहले ही माफ कर चुकी है। गांवों में इस समय मुश्किल से 10 प्रतिशत उपभोक्ता ही पेयजल का नियमित रूप से भुगतान कर रहे हैं। इस प्रकार पानी के बिलों का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं शहर के बिलों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। शहर के बिल इस समय 120 रुपये प्रति माह हैं। जिले में इस समय साढ़े 33 हजार पेयजल कनेक्शन हैं। सरकार गांवों के पेयजल सिस्टम को ग्राम पंचायतों के अधीन करने पर भी काफी दिनों से विचार कर रही है ताकि पंचायत के राजस्व में तो बढ़ोतरी हो।
जानकारी के अनुसार गांवों के लोग बिना विभाग की अनुमति के ही पेयजल कनेक्शन लगा लेते हैं। विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगती जबकि कनेक्शन लेने की फीस 500 रुपये ही है। विभाग की ओर से ऐसे लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की सख्ती नहीं बरती गई है। विभाग गांवों व शहर में नियमित रूप से पेयजल के बिल भी नहीं भेज रहा है। नियमित रूप से बिल जमा नहीं होने से विभाग को लगातार घाटा झेलना पड़ रहा है। पिछले कई वर्षों से विभाग ग्रामीण उपभोक्ताओं से मात्र 20 रुपये प्रति माह ही वसूलता रहा है जबकि अनुसूचित वर्ग के लिए यह बिल राशि मात्र 10 रुपये है। उपभोक्ता 20 रुपये चुकाने से भी परहेज करतेे रहे हैं। अब विभाग ने यह बिल चार्ज प्रति माह 20 से बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया है। इस संबंध में विभाग के पास हैड ऑफिस से पत्र आ चुका है। शहर में यह बिल चार्ज प्रतिमाह 120 रुपये है जिन उपभोक्ताओं ने अपने कनेक्शन पर पानी का मीटर लगवा रखा है उससे 60 रुपये प्रति माह चार्ज लिया जाता है। पेयजल के यह नए रेट गत एक जून से प्रभावी हो गए हैं। विभाग इस समय प्रति छह माह में एक बार बिलों की वसूली करता है। विभाग ने एक साल के बिल भुगतान की भी व्यवस्था कर रखी है यह उपभोक्ता की स्वेच्छा पर निर्भर करता है।
विज्ञापन

गांवों में बकाया राशि का आंकड़ा पहुंचा 63 लाख
गांवों में पेयजल बकाया राशि का आंकड़ा अब 63 लाख तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा मार्च 2015 के बाद का है। दो माह पहले विभाग ने गांवों में पानी के बिल भिजवाए भी हैं लेकिन ग्रामीण पेयजल बिल का भुगतान करने में अभी भी रुचि नहीं ले रहे हैं। कुछ गांवों के सरपंचों ने तो पेयजल बिल वापिस विभाग को लौटा दिए। इन सरपंचों ने विभाग को बताया कि ग्रामीण पेयजल बिल का भुगतान करने से स्पष्ट इंकार कर रहे हैं। शहर में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 60 प्रतिशत है जो पानी का नियमित रूप से बिल चुका रहे हैं।
जिले में 58 जलघरों के जरिए होती है पानी की आपूर्ति
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के 58 जलघरों के जरिए गांवों व शहर में पानी की सप्लाई करता है। इतना जरूर है कि कई गांवों में विभाग नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। नहरों के जरिए इन जलघरों में पानी नहीं पहुंच पाता ऐसे में ग्रामीण खेतों में लगे ट्यूबवेल, हैंडपंप व अन्य संसाधनों के जरिए पानी की आपूर्ति कर रहे हैं।
कई गांवों के सरपंच लौटा चुके हैं विभाग के बिल
करीब दो माह पहले जन स्वास्थ्य विभाग ने शहरी तर्ज पर ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी पेयजल बिल भेजे थे। विभाग की यह प्लानिंग कई पंचायतों को रास नहीं आई थी। इसका विरोध करते करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों ने पंचायत की अगुवाई में बिल वापिस जन स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में लौटा दिए थे। दो माह बीतने के बाद भी विभाग व पंचायतों के बीच इस संबंध में सहमति नहीं बन पाई है।
विज्ञापन

== वर्जन===
उपभोक्ताओं को पानी के बिल नियमित रूप से जमा करवाने चाहिए ताकि सरकारी राजस्व में इजाफा हो सके। लोगों को अपने वैध कनेक्शन भी अपने आप वैध करवाने चाहिए। विभाग सहयोग देने को तैयार है। पेयजल बिल के बढ़े रेट एक जून से प्रभावी हो गए हैं।
रामरूप, बिजली इंचार्ज, जन स्वास्थ्य विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें