संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। ऑनलाइन ठगी के वारदात को अंजाम देने के लिए साइबर अपराधी अब युवाओं को निशाना बनाने लगे हैं। साइबर अपराधी युवाओं को झांसा देकर उनका बैंक खाता खरीदते हैं और उस बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी में करते हैं। जब पुलिस किसी मामले की जांच करती है तो बैंक खाता नंबर बेचने वाले युवाओं का नाम ट्रैस होता है। बैंक खाता बेचने वाले जिले के तीन युवाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है।
साइबर अपराधी छात्र और बेरोजगार युवाओं को लालच देकर उनका पहले बैंक खाता खुलवाते हैं। इसके बाद उन्हें कुछ हजार रुपये का लालच देकर खातों का एक्सेस हासिल करते हैं। फिर इन खातों का उपयोग ठगी की रकम ट्रांसफर करने में करते हैं। वारदात के बाद अपराधी रुपये निकलवा लेते हैं। साइबर अपराधी कई मामलों में ऑनलाइन नौकरी का झांसा देकर बैंक खाता खुलवाते हैं और नौकरी का फर्जी विज्ञापन पोस्ट करते हैं। जब युवा उनसे संपर्क करते हैं तो सेलरी अकाउंट खुलवाने के लिए उनसे दस्तावेज लेकर खाता खुलवाने की बात कहते हैं। इसके बाद एटीएम पिन, चेक बुक हासिल कर लेते हैं। इन खातों में अपना मोबाइल नंबर ऐड करवाकर वारदातों को अंजाम देते हैं।
जिले के रामपुरा के 1 और पाल्हावास गांव के 2 युवकों को पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। तीनों युवकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने कहा कि बच्चे निर्दोष हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले गई है। लालच में आकर उन्होंने अपना बैंक खाता नंबर दिया। संवाद
केस नंबर 1:
पिछले दिनों फरीदाबाद साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने साइबर ठगी के एक आरोपी गांव रामपुरा निवासी एक आईटीआई के विद्यार्थी को पकड़ा था। फरीदाबाद के सेक्टर-28 की एक महिला ने साइबर थाने में दी शिकायत में बताया था कि वाट्सएप पर एक मैसेज मिला, जिसमें घर बैठे पैसे कमाने का लालच दिया गया। एक व्यक्ति ने टेलीग्राम के कस्टमर सर्विस फाइनेंस नाम के ग्रुप में जोड़ा। टास्क पूरा करने के नाम पर उससे यूपीआई के माध्यम से कुल 2,18,446 रुपये ठग लिए गए। पुलिस जांच में सामने आया था कि रामपुरा निवासी छात्र ने अपना बैंक खाता 4 हजार रुपये में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया था, जिसमें पीड़िता के 37,720 रुपये जमा हुए थे। आरोपी के खिलाफ अन्य राज्यों में भी इसी तरह के 5 मामले दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपी को 3 दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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केस नंबर 2
साइबर ठगों को अपना बैंक खाता नंबर देने वाले पाल्हावास निवासी दो युवकों को पिछले दिनों पश्चिम बंगाल की पुलिस पकड़ कर अपने साथ ले गई थी। यह मामला साइबर ठगों को अपना बैंक खाता बेचने से जुड़ा है। एक युवक के खाते में 60 लाख और दूसरे के खाते में 10 लाख रुपये थे। पश्चिम बंगाल की पुलिस साइबर ठगी के मामले की जांच कर रही थी। जब जांच की तो पता चला कि दोनों खाता नंबर रेवाड़ी के गांव पाल्हावास के रहने वाले दो युवकों का है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस दोनों युवकों को गिरफ्तार किया था। युवकों ने बताया था कि वे साइबर ठगों के झांसे में आ गए थे। जो पैसा आ रहा था वह ठग अपने उपयोग में ला रहे थे। बैंक में जो नंबर दिया गया था वह साइबर ठगों ने अपना दिया था। ऐसे में जो लेनदेन होती थी, युवकों को उसका पता नहीं चलता था। दोनों युवकों ने चंद पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खाता साइबर ठगों को दिया था।
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वर्जन :
व्हाट्सएप काॅल, अनजान लिंक, टेलीग्राम चैनल, मोबाइल कॉल पर भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। अब साइबर ठग ज्यादातर खाताधारक को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर लिंक भेज कर शेयर ट्रेडिंग करने और रातों-रात मुनाफा कमाने का लालच देकर उन्हें फंसा रहे हैं। सतर्क रहने की जरूरत है। साइबर अपराध घटित होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फोन करें या पुलिस की साइबर क्राइम की वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।-डॉ. मयंक गुप्ता, पुलिस अधीक्षक, रेवाड़ी
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