आईजीयू में शिक्षा एवं बिग डेटा एनालिटिक्स विषय पर दो दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में शिक्षा एवं बिग डेटा एनालिटिक्स विषय पर दो दिवसीय वर्कशॉप का बुधवार को शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो.जेपी यादव ने किया। उन्होंने आज की दुनिया में नई तकनीकों के महत्व के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह वर्कशॉप शिक्षा के विकास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। बिग डेटा एनालिटिक्स की शक्ति का उपयोग करके हम पारंपरिक शिक्षण मॉडल से आगे बढ़ सकते हैं। साथ ही व्यक्तिगत शिक्षण मार्ग बना सकते हैं, जो प्रत्येक व्यक्तिगत शिक्षार्थी की अनूठी जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करते हैं।
जेएनयू दिल्ली के प्रो. दीपक शर्मा (सेवानिवृत्त) इस वर्कशॉप में विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बिग डेटा एनालिटिक्स पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मन और मस्तिष्क की विभिन्न अपरिचित तथ्यों की जानकारी देते हुए लर्निंग, मेडिटेशन के द्वारा स्मृति को स्थिर बनाने के तरीके बताए। उन्होंने अनुभव और विश्लेषण के प्रति विशेष जोर दिया।
अनिल कुमार प्रिंसिपल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कंवाली ने राव मोहर सिंह की संघर्षशील जीवन शैली पर रोशनी डाली। बताया कि उन्होंने किस प्रकार दलित गांव और महिलाओं के उत्थान के लिए घर-घर जाकर विकास की लौ जगाई। स्कूल की कमी के कारण कैसे लोग अपने नाते-रिश्तेदारों को पढ़ाने के लिए तत्पर रहते थे।
वर्कशॉप की संयोजिका प्रो. सविता श्योराण ने सभी अतिथियों एवं विशेषज्ञों का स्वागत किया। उन्होंने प्रतिभागियों को आज के युग में प्रौद्योगिकी एवं उनके उपयोग के बारे में बताया। वर्कशॉप के अध्यक्ष प्रो. सतेंद्र बल गुप्ता ने कहा कि प्रौद्योगिकी छात्रों को गंभीरता से सोचने, जानकारी का विश्लेषण करने और जटिल समस्याओं को हल करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
डॉ. रीना हुड्डा, वर्कशॉप सचिव ने मंच संचालन के माध्यम से वर्कशॉप को एक सुव्यवस्थित रूप प्रदान किया। विभाग के पीएचडी शोधार्थियों और स्वयंसेवी छात्रों ने कार्यक्रम के समुचित प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्कशॉप के अंत में डॉ. शिवानी ने सबका धन्यवाद किया।
वर्कशॉप की अन्य जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन डॉ. अजय कुमार, डॉ. शिवानी, डॉ. पूजा, जोगेंद्र, प्रशांत द्वारा किया गया। तकनीकी पहलुओं पर योगेश, विजय कुमार, विकास, ललित, प्रदीप रंगा का सहयोग रहा। इसमें विश्वविद्यालय के अलावा देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 50 प्रतिभागी शामिल थे। प्रतिभागियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दो मोड आयोजित किए गए।