रेवाड़ी। भाड़ावास फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में लगे श्रमिकों की सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। श्रमिक बिना किसी सुरक्षा के ओवरब्रिज पर काम करने में लगे हुए हैं। अगर किसी श्रमिक का पैर फिसलता है तो वह सीधे नीचे गिर सकता। अभी ओवरब्रिज का निर्माण कार्य रेलवे लाइन के ऊपर की ओर चल रहा है, यहां काफी खतरा है।
ओवरब्रिज के ऊपर एक ग्रिल लगाई गई है। ग्रिल के ऊपर खड़े होकर श्रमिकों को अपना कार्य करना पड़ता है। अगर ग्रिल जाने अनजाने में टूट जाती है तो इससे श्रमिक की जान पर बात आ सकती है। बचाव को लेकर प्रशासन या ठेकेदार की ओर से किसी भी प्रकार का प्रबंध नहीं किया गया है। ऐसे में श्रमिक भी डर के साए में काम करने को मजबूर हैं। पिछले माह एक श्रमिक काम करते हुए नीचे गिर गया था। इस दौरान उसे काफी चोटें आईं थी। तब स्थानीय लोगों ने भी इस बात का विरोध किया था कि श्रमिकों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बार-बार बढ़ाई जा रही डेडलाइन
एचएसआरडीसी की ओर से दिसंबर 2021 में काम शुरू किया गया था। अधिकारियों के अनुसार प्रोजेक्ट की डेडलाइन जून-2023 थी, मगर काम देरी से शुरू होने के चलते और देरी होती गई। अभी तक इसमें 18 माह की देरी हो चुकी है। फिर इसकी डेडलाइन सितंबर 2024 बताई जा रही थी, लेकिन इस अवधि में काम पूरा नहीं हुआ।
ओवरब्रिज के एक हिस्से का निर्माण लगभग पूरा हो चुका
रेलवे ओवरब्रिज के दूसरी तरफ का काम शुरू हो गया है। दूसरी ओर पर गार्डर रखवा दिए गए हैं। एक साइड का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है। फिलहाल एक हिस्से के स्टील ट्रस का काम लगभग पूरा हो गया है। अब सिर्फ रोड का काम किया जाना है। उम्मीद है कि इस लेन को अगले माह मार्च के अंत तक खोला जा सकता है। हालांकि, अभी एक लाइन को खोले जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मगर लोगों को हो रही असुविधा को देखते हुए एक लाइन को खोले जाने की मांग की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो होली के बाद बड़ी राहत मिल सकती है। जून जुलाई में पूरा ओवर ब्रिज तैयार होने की उम्मीद है।
लोगों को आने जाने में होती है परेशानी
बावल हल्के के 35 गांव इस रोड पर पड़ते हैं जो जाटूवास गांव से शुरू होकर खंडोड़ा गांव तक पड़ते हैं। लोगों का कहना है कि छोटे-मोटे काम के लिए रेवाड़ी जाना पड़ता है और रेवाड़ी जाने का एकमात्र यही रास्ता है। इस रास्ते के बंद होने की वजह से उनको बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। सबसे ज्यादा यहां की कंपनीबाग, हंस नगर, न्यू आदर्श नगर व परशुराम कॉलोनी की 5 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है।
वर्जन
नियम के मुताबिक श्रमिकों की सुरक्षा पर संबंधित विभाग को विशेष ध्यान देना चाहिए। सेफ्टी का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। एक जगह पर जहां खड़े होने के लिए लोहे की ग्रिल बनाई गई है, उसके नीचे एक और ग्रिल होनी चाहिए। अगर पहली ग्रिल गिरती है तो दूसरी ग्रिल से श्रमिक बच सकता है।
- कामरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट, हरियाणा राज्य प्रधान, आल इंडिया ट्रेड यूनियन यूनाईटेड सेंटर