शहर से करीब 15 किलोमीटर गांव मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में पिछले चार दिनों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों हटाने और लगाने के मामले लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी स्टॉफ ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर जमकर बवाल काटा।
कर्मचारियों करीब दो बजे यूनिवर्सिटी में हड़ताल कर दी और मुख्य गेट पर धरना देकर बैठ गए। कर्मचारी स्टॉफ कुलसचिव के लिखित आश्वासन की मांग को लेकर घंटो तक अड़ रहे। आखिर देर शाम करीब करीब सात बजे मुख्य गेट पर पहुंचकर रजिस्ट्रार द्वारा नौकरी से नहीं हटाने के आश्वासन के बाद ही कर्मचारी हड़ताल खत्म कर काम पर लौटे।
मामले की गंभीरता के देखते हुए एसडीएम कैप्टन मनोज कुमार, डीआरओ पीडी शर्मा, तहसीलदार नौरंग राय व डीएसपी बिरेंद्र सैनी भी मौके पर पहुंचे। वहीं हड़ताली कर्मचारियों के बीच कुलसचिव मदनलाल गोयल ने हड़ताली कर्मचारियों का विश्वविद्यालय में हो रहे भ्रष्टाचारों की याद दिलाई। यहां बता दें कि हड़ताल करने वाले कर्मचारियों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ सिक्योरिटी गार्ड, माली, चपरासी भी शामिल थे। कर्मचारियों के समर्थन में ग्रामीण भी धरने पर पहुंच गए।
यह थे कर्मचारियों के आरोप
विश्वविद्यालय में सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मी और चपरासी सहित अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिलाकर 95 लोग काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि जब से नए कुलसचिव ने कार्यभार संभाला है, उन्हें जेई के माध्यम से विश्वविद्यालय से निकालने का प्रयास चल रहा है।
सिक्योरिटी गार्ड कृष्ण कुमार, देवप्रकाश व चपरासी कोशल यादव ने बताया कि उन्हें जेई ने बुधवार सुबह से नौकरी पर नहीं आने के लिए कहा लेकिन कर्मचारियों के विरोध के चलते उन्हें फिर से वापस ले लिया गया। उन्होंने बताया कि एक जनवरी को बीस सफाई कर्मचारियों को नौकरी पर नहीं आने के लिए कह दिया गया, लेकिन शाम को फिर वापस बुला लिया गया।
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कांग्रेस शासन काल में लगाया गया था, लेेकिन जैसे ही भाजपा सरकार बनी तथा नए कुलसचिव ने कार्यभार संभाला है, उन्हें हटाने की साजिश रची जा रही है। वहीं कर्मचारियों ने यह भी कहा कि वे सभी मीरपुर गांव के हैं तथा उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए 100 एकड़ जमीन दे रखी है। जिस समय विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ था, उस समय गांव के लोगों को नौकरी देने की बात हुई थी। लेकिन अब उन्हें निकालने की साजिश रची जा रही है।
कुछ यूं चला घटनाक्रम
सुबह तीन कर्मचारियों को हटाने के खबर सुनते ही, सभी कर्मचारी एकत्रित हुए तथा बैठक की। बैठक में निर्णय हुआ कि विश्वविद्यालय का गेट बंदर कर हड़ताल कर रजिस्ट्रार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाए। इसके बाद सभी कर्मचारी करीब दो बजे हड़ताल पर बैठ गए। हड़ताली कर्मचारियों के साथ ग्रामीण भी गेट पर आकर बैठ गए तथा कुलसचिव को वहीं पर बुलाकर कर्मचारियों को नहीं हटाने के लिखित आश्वासन की मांग की।
गुड़गांव में कुलपति के साथ मीटिंग के लिए गए रजिस्ट्रार खबर सुनते ही विश्वविद्यालय में पहुंचे तथा जिस जेई पर कर्मचारियों को निकालने व अभद्रता करने का आरोप लग रहा था, उसे कर्मचारियों से बातचीत करने के लिए भेजा। लेकिन कर्मचारी नहीं माने।
इसके बाद कुलसचिव हड़ताली कर्मचारियों के बीच पहुंचे तथा किसी को भी नहीं निकालने का आश्वासन यह कह कर दिया कि अब सभी को काम करना होगा, पहली वाली बात अब नहीं चलेगी। इस आश्वासन के बाद हड़ताली कर्मचारी काम पर लौट गए। इस दौरान योगेश, इंद्र, संदीप, दौलत, प्रवीण, सत्यनारायण आदि कर्मचारियों के साथ कृष्ण, उदयराज, महाबीर,वेद आदि ग्रामीण भी मौजूद थे।
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वर्जन-
विश्वविद्यालय से किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया गया है। यह समझ में नहीं आ रहा क्यों कर्मचारी हड़ताल पर गए। विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- डॉ. मदन लाल गोयल, रजिस्ट्रार