सोमवार का दिन सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। छह डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के बीच दिनभर चलीं सर्द हवाओं ने लोगों को कंपकपा दिया। वहीं अधिकतम तापमान भी लुढ़कर कर 13 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इससे लोग पूरे दिन में ठिठुरते दिखे। जगह-जगह अलाव के सहारे बैठकर राहत लेते भी दिखे। कोहरा होने के कारण दृश्यता भी बहुत कम रही। सड़कों पर यातायात रेंगता दिखा। बाजारों में सन्नाटा छाया रहा। बाजारों में इक्का-दुक्का लोग ही दिखाई दिया। दिनभर सूरज बादलों के पीछे छिपे रहे।
रविवार रात से शुरू हुई सर्द हवाएं सोमवार को दिनभर अपना कहर बरपाती रहीं। सुबह हलके कोहरे की वजह से सड़कों को अपरान्ह तक निजात नहीं मिल सकी। हाल यह रहा कि वाहनों की हेडलाइट जलाकर लोगों को सड़कों पर सफर करना पड़ा। सर्द हवाओं ने लोगों को पूरा दिन परेशान किए रखा। ठंड से राहत पाने के लिए लोग ऊनी कपड़ों में ढ़के नजर आए। कुछ जगह अलाव, तो कहीं पर लोगों ने कूडे़-करकट के ढ़ेर को जलाकर भी खुद को सर्दी से बचाया।
दिनभर सूर्यदेव ने दर्शन नहीं दिए, वहीं शाम पांच बजते ही मौसम ने फिर करवट बदली। अंधेरा होने से पहले ही कोहरे ने शहर को अपनी आगोश में ले लिया। शीतलहर के कारण सामान्य जनजीवन पर भी असर नजर आया। आम दिनों की अपेक्षा सोमवार को छह बजते-बजते आधे से ज्यादा बाजार बंद हो गए। सड़कों को पर वाहनों की रफ्तार भी थम सी गई।
ह्रदय रोगियों के लिए ठंड घातक, सुबह की सैर से करें परहेज
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में भी काफी इजाफा देखने को मिला। सबसे ज्यादा संख्या बुखार, कोल्ड डायरिया और हृदय रोगियों की रही। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ रणवीर सिंह ने बताया कि ये ठंड ह्रदय रोगियों के लिए बेहद चिंता का विषय है। बुजुर्गों व बच्चों को इस कडाके की ठंड में घर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। जो ह्रदय रोगी हैं, उन्हें भी कुछ दिन के लिए सुबह की सैर से बचना जरूरी है। क्योंकि ठंड के मौसम में हॉर्ट अटैक के मरीज बढ़ जाते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज अपनी सेहत का ख्याल रखें और कोहरे एवं सर्दी के संपर्क में आने से बचें।
नाकाफी हैं प्रशासनिक इंतजाम
सरकार के सख्त आदेश हैं कि शीतलहरी से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम कराए जाएं। लेकिन, शहर में सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश स्थानों पर अलाव गायब हैं। लोगों को कूड़ा और टायर आदि जलाकर सर्दी से बचाव करना पड़ रहा है। जबकि अधिकांशतय शीतलहर से बचने के प्रशासन की ओर से अलाव आदि की व्यवस्था की जाती रही है, लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से इस तरह के कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं।