हल्द्वानी (उत्तराखंड) के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित संतोष ट्राफी फुटबॉल प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने गई प्रदेश की टीम का उप कप्तान रेवाड़ी के मोहल्ला कुतुबपुर निवासी 20 वर्षीय राहुल को बनाया गया है। हरियाणा टीम का उप-कप्तान बनाए जाने से राहुल ने न सिर्फ जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि इस उपलब्धि से उनके पिता का देखा गया सपना भी पूरा हुआ है।
साधारण परिवार में जन्मे राहुल के सामने बचपन से ही अनेक चुनौतियां थीं। तीन भाइयों में सबसे छोटे राहुल के सामने पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद परेशानी और बढ़ गई थी, लेकिन फुटबॉल में नेशनल खेल चुके मंझले भाई दीपक ने हौसला दिया और राहुल ने फुटबॉल के लिए अपने आप को समर्पित कर दिया। राहुल के पिता एक भट्ठे पर काम करते थे। उनका सपना था कि उनका बेटा फुटबॉल के क्षेत्र में उनका और जिले का नाम रोशन करे। उनका यह सपना राहुल ने भारतीय फुटबॉल संघ और उत्तराखंड फुटबॉल संघ की ओर से हल्द्वानी के इंदिरा गांधी स्टेडियम में 22 से 27 सितंबर तक संतोष ट्राफी के लिए हरियाणा की टीम का उप कप्तान बन पूरा कर दिया। इस प्रतियोगिता में हरियाणा के अलावा कई राज्यों की टीम भाग ले रही हैं।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने से बडे़ भाई को छोड़ना पड़ा खेल का मैदान
राहुल के पिता के निधन के बाद बड़े भाई दीपक ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। दीपक भी फुटबॉल के नेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें अपने खेल के सपने को बीच में ही छोड़ना पड़ा और फुटबॉल कोच के रूप में शहर के एक निजी स्कूल में नौकरी कर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने अपने छोटे भाई राहुल को फुटबाल में आगे बढ़ाया।
प्रतिदिन छह घंटे की कड़ी मेहनत से पाया मुकाम
राहुल ने प्रतिदिन शहर के स्थानीय राव तुलाराम स्टेडियम में पसीना बहाया। अपनी इस कामयाबी के पीछे राहुल ने प्रतिदिन पांच से छह घंटे कड़ी मेहनत की। परिस्थिति कोई भी हो राहुल हर दिन सुबह-शाम स्टेडियम में जाकर अभ्यास करना नहीं भूूलते हैं।
राहुल में असीमित प्रतिभा : कोच
इससे पहले राहुल पिछले साल की संतोष ट्राफी में अंडर ऐज खिलाड़ी के रूप में भाग लिया था। इसके अलावा राहुल आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में भाग ले चुका है। राहुल सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुका है। कोच चरण सिंह ने बताया कि राहुल असीमित प्रतिभा का धनी है। इस मुकाम पर पहुंचने के लिए इसने बहुत कड़ी मेहनत की है। कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि यह आज उप कप्तान के रूप में टीम में खेल रहा है।
सरकारी सुविधा नहीं मिलने का है मलाल
राहुल के भाई दीपक का कहना है कि सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं मिल रही है। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें भी खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा। राहुल के लिए सभी व्यवस्थाएं जुटाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि सरकार की ओर से सुविधाएं मिलती तो उन्हें खेल बीच में छोड़कर नौकरी के लिए मजबूर न होना पड़ता।