रेवाड़ी। इस बार मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहा है। एक जून से एक अगस्त तक प्रदेश में 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर अब खरीफ फसलों पर संकट के रूप में दिख रहा है।
बारिश की कमी से खेतों में नमी लगातार घट रही है। बाजरा, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर पौधों का फुटाव भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहा है। आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होने पर उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
एक जून से एक अगस्त तक कुल 148 मिलीमीटर वर्षा हुई। जबकि सामान्य औसत वर्षा 208.8 मिलीमीटर मानी जाती है। यह सामान्य से करीब 27 से 29 फीसदी कम बारिश है। सामान्यतः 150 मिलीमीटर से अधिक वर्षा फसलों के लिए लाभदायक होती है।
जिले में खरीफ की अधिकांश खेती वर्षा पर आधारित है। बारिश की कमी से फसलें मुरझाने लगी हैं। पौधों की बढ़वार धीमी पड़ने से दानों के विकास पर असर होगा। उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर सिंचाई आवश्यक होगी। इस बार बाजरा का रकबा 1,04,365 एकड़, कपास का 6,820 एकड़ है।
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आगामी मानसून और मौसम
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, अगस्त और सितंबर में भी मानसून कमजोर रहने की संभावना है। आठ अगस्त तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ सकती है। इससे बिखराव वाली वर्षा की गतिविधियां तेज होने के आसार हैं। कुछ क्षेत्रों में फसलों को इससे राहत मिल सकती है। हालांकि, व्यापक और लगातार बारिश के बिना स्थिति सामान्य होना मुश्किल है। हरियाणा एनसीआर दिल्ली में दिन और रात का तापमान सामान्य से अधिक है।