रेवाड़ी। कालाका और लिसाना स्थित जलघरों के टैंकों में अब केवल 20 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है। सोनीपत के खूबड़ू हेड से आज नहर में पानी छोड़ा जाएगा जिसे रेवाड़ी तक पहुंचने में कम से कम दो दिन का समय लगेगा।
नहरबंदी के कारण पिछले 21 दिनों से शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन पानी की आपूर्ति की जा रही है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टैंकों में बचा हुआ पानी सीमित है, इसलिए जब तक नहर में में पानी नहीं आता, तब तक कटौती रहेगी।
शहर में पेयजल के लिए अतिरिक्त जलघर की दो दशक से जरूरत है। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है लेकिन अभी नहीं मिल सकी है। ई-भूमि पोर्टल के जरिए भी जमीन देखी गई है। जमीन पोर्टल पर तो डाली गई है, जो केस बनाकर सरकार के पास भेजा हुआ है। अभी योजना सिरे नहीं चढ़ सकी है। जमीन मिलने पर ही वाटर टैंक का समाधान हो सकता है।
वाटर टैंकों में 15 से 20 दिन का पानी हो सकता है एकत्रित
शहर की पेयजल सप्लाई नहरी पानी पर आधारित है। सोनीपत के खूबड़ू हेड से पानी छोड़ा जाता है और जेएलएन से होते हुए कालाका में 5 व लिसाना में 3 वाटर टैंकों में पानी का स्टोरेज होता है। लिसाना में अतिरिक्त पानी का स्टोरेज हो जाता है लेकिन कालाका में अतिरिक्त पानी जमा नहीं हो पाता। यहां से अधिकतम 15 से 20 दिन ही पानी की नियमित आपूर्ति हो सकती है। इसलिए शेड्यूल बदलते ही पानी की समस्या गहरा गई है। गर्मी के दिनों मई, जून, जुलाई व अगस्त में तो यह समस्या हर माह रहती है लेकिन अब सर्दी में भी समस्या पैदा हो गई है।
यह रहा नया शेड्यूल
अभी तक 16 दिन नहर में पानी का क्लोजिंग टाइम था और 16 दिन ही नहर में पानी चलता था लेकिन अब नए शेड्यूल अनुसार 24 दिन पानी नहर में बंद रहेगा और 16 दिन पानी रनिंग रहेगा।
वर्जन:
20 जनवरी को सोनीपत के खूबड़ू हेड से नहर में पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद दो दिन वाटर टैंकों को भरा जाएगा। गैज बनने के बाद ही शहर में सप्लाई नियमित की जा सकेगी। - हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग