रेवाड़ी। खुबडू हेड से चार मार्च को छोड़ा जाने वाला पानी अब पांच मार्च को छोड़ा जाएगा। इसके चलते लोगों को होली पर पानी की राशनिंग का सामना करना पड़ेगा। जिले में नहरी पानी 7 मार्च को पहुंचेगा। इसके बाद टैंकों में पानी भरने के बाद दो से तीन दिन बाद ही लोगों पर्याप्त पेयजल सप्लाई होगा।
शहरवासियों को 10 मार्च के बाद ही पानी रोजाना मिलेगा। अभी जल घर के टैंकों में 20 प्रतिशत ही पानी शेष है और जरूरत को देखते हुए एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है। ऐसे में पेयजल की किल्लत को देखते हुए शहरवासियों को पानी की कमी के बीच होली मनानी पड़ेगी।
बात भूजल की करें तो गर्मी के चलते यह भी नीचे हो गया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने स्पष्ट किया है कि हालात सामान्य होने तक नियमित शेड्यूल से ही पानी दिया जाएगा।
22 दिनों से एक दिन छोड़कर दे रहे पानी
पिछले करीब 22 दिनों से एक दिन छोड़कर शहर में पानी की सप्लाई हो रही है। स्थिति यह है कि बाहरी कॉलोनियों में तो कई बार पानी की मोटर चलने के बावजूद अंतिम घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। सबसे अधिक समस्या टेल एंड वाले लोगों को हो रही है
विभाग ने की पेयजल बचत करने की अपील
नहर में पानी छोड़ने का शेड्यूल 14 दिन का होता है जबकि 24 दिन क्लोजर होता है। इस बार चार फरवरी को नहर में पानी आना बंद हो गया था और एक मार्च को दोबारा पानी छोड़ा जाना था। लेकिन शेड्यूल में बदलाव के कारण 4 दिन की देरी हो गई है। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सूखी होली मनाने को प्राथमिकता दें और पानी की बचत करें।
बड़ा टैंक बने तो पेयजल की समस्या हो सकती है ठीक
भाड़ावास गेट निवासी रोहित यादव ने बताया कि एक और बड़ा वाटर टैंक बन जाए तो पेयजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता होने से नहर बंद रहने के दिनों में भी नियमित आपूर्ति संभव हो सकेगी। शास्त्री नगर निवासी विवेक कुमार ने बताया कि वर्तमान में कालाका में पांच और लिसाना में तीन वाटर टैंक बने हैं। इन्हीं टैंकों में नहरी पानी का भंडारण कर पूरे शहर में आपूर्ति की जाती है। बढ़ती आबादी के सामने यह व्यवस्था अपर्याप्त साबित हो रही है।
नहरी पानी दो दिन और लेट हो गया है। पानी अब पांच मार्च को छोड़ा जाएगा जो सात तक पहुंचेगा। लोगों से अपील है कि पानी की बचत करें।
- हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी