शहरवासियों को पीने के लिए पहले से ही अपर्याप्त पानी मिल रहा है। वहीं सिंचाई विभाग द्वारा शहर का पानी रोककर नारनौल भेजे जाने से यहां के लोगों की समस्या को और बढ़ा दिया है। एक महीने पहले झज्जर के मातनहेल में नहर टूटने से शहर में पहले 16 दिन की जगह पांच दिन ही पानी मिल पाया था।
बाद में नहर की मरम्मत होने पर पांच दिन और पानी दिया लेकिन इसके बाद सिंचाई विभाग ने रेवाड़ी के हिस्से के पानी कर रुख नारनौल की ओर कर दे दिया। इससे एक बार फिर शहरवासियों को पानी कम मिल रहा है। हाल यह है कि जिस नहर में 16 दिन अकेले रेवाड़ी को पानी दिया था, उसी समय में चार दिन रेवाड़ी और चार दिन नारनौल को पानी दिया जाना शुरू किया गया है।
क्योंकि नहर में पानी पीछे से कम आ रही है। चार दिन रेवाड़ी में स्टोरेज करने के बाद चार दिन नारनौल में दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई है। इस स्थिति में पानी सप्लाई का समय भी दस मिनट तक का घटाया जा चुका है। ऐसे में यदि पानी को सही तरीके से इस्तेमाल करते हुए बचाया नहीं गया तो आगे जल संकट और बढ़ सकता है। इधर जन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पहले से कम पानी मिल रहा था। बीच में नारनौल को पानी देने के चलते यह समस्या और गहरा गई है।
प्रतिदिन शहर को 2 करोड़ पचास लाख लीटर पानी जरूरत
नहरी पानी से शहर की प्यास बुझाने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन 2 करोड़ 50 लाख लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। नहरी पानी से कालका स्थित पांच जलाशयों में पानी एकत्रित कर शहर को पानी सप्लाई किया जाता है। लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा अब नहर में 16 दिन चलने वाले पानी का समय दो और घटाकर 14 दिन कर दिया गया है। जिसमें भी दोनों जिलों को जोड़ा गया हे। जबकि नहर में पानी बंदी का समय 24 दिन रखा हुआ है। ऐसे में साफ है कि आने वाले समय में पानी का संकट जरूर होगा। रेवाड़ी के हिस्से का पानी पूरा नहीं मिलने के कारण यहां पानी की समस्या घहराना स्वाभाविक है।
प्रति व्यक्ति को 100 की जगह मिलेगा 50 लीटर पानी
शहर की लगभग ढाई लाख आबादी को जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से औसतन 100 लीटर प्रति व्यक्ति पानी दिया जाता है। लेकिन पहले से ही पानी की किल्लत झेल रहे शहर को अब केवल 50 लीटर प्रति व्यक्ति पानी ही मिल पाएगा। क्योंकि शहर के पानी में कटौती कर इस पानी को नारनौल भेज दिया गया है।
इन क्षेत्रों में रहती है पानी भारी किल्लत
यूं तो गर्मी के मौसम में पूरे शहर में पानी की किल्लत रहती है, लेकिन शहर की बाहरी कॉलोनियों को सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। आनंद नगर, विजय नगर, उत्तम नगर, पूर्ण नगर, साधुशाह नगर, मयूर विहार एवं कालका रोड स्थित विकास नगर में पानी समस्या बनी रहती है।
अमर उजाला अपील
पूरे देश में जगह-जगह पानी का संकट बना हुआ है। हमें यहां कुछ पानी मिल रहा है तो इसे ठीक तरह से इस्तेमाल करना चाहिए। शहर में जगह-जगह बिना टोंटियों के नल लगे हुए हैं, जिससे पानी बहता रहता है। कुछ लोग टोंटियों को खुला छोड़ रहे हैं। गाड़ियों तक को धोने में पेयजल का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए सभी शहरवासियों को पानी बचाकर इस जल संकट से बचना होगा।
वर्जन....
प्राथमिकता के तौर पर पानी दिया जा रहा है। पीछे से पानी कम मात्रा में आ रहा था। इसलिए रेवाड़ी और नारनौल में पानी स्टोरेज में दिक्कत आ रही थी। इसलिए चार दिन रेवाड़ी में स्टोरेज करने के बाद यहां चार दिन सप्लाई रोककर नारनौल में पानी दिया गया। वहां पर ज्यादा समस्या थी। अब चार दिन यहां चलने के बाद चार दिन फिर नारनौल को पानी दिया जाएगा।
एसके सिंगला, एक्सईएन, नहरी विभाग
पानी की कम आपूर्ति होने से पेयजल में समस्या आनी तय है। लेकिन जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। चार दिन स्टोरेज कर लेते हैं। लेकिन नहर में पानी बंद रहेगा, उस वक्त समस्या ज्यादा बढ़ जाएगी।
अशोक डागर, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग