रोहतक। समाज जिन बच्चों को कमजोर समझकर नजरअंदाज कर देता है, वही बच्चे जब राष्ट्रीय मंच पर पहुंचते हैं तो सोच बदलने पर मजबूर कर देते हैं। रोहतक के आर्यन गठवाला और पार्थ शर्मा ने स्पेशल ओलंपिक्स भारत की नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि कमी नहीं, अवसर की जरूरत होती है।
कभी जिनकी आवाज ने साथ नहीं दिया आज उनकी कामयाबी शोर मचा रही है। संवाद
नीरज चोपड़ा से प्रेरणा ली, जेवलिन में पहचान
सिरतार के खिलाड़ी आर्यन ने नीरज चोपड़ा को अपना आदर्श मानकर खेल की राह चुनी। बचपन में उनका आईक्यू लेवल लगभग 50 प्रतिशत पाया गया। शुरुआत में वे सामान्य स्कूल में पढ़े लेकिन वहां मिले तानों और उपेक्षा ने उनका आत्मविश्वास तोड़ दिया। इसके बाद 2023 में उन्हें सिरतार स्कूल में दाखिला लिया जहां से उनके खेल जीवन की नई शुरुआत हुई।
रोज 3-4 घंटे अभ्यास, स्टेट से नेशनल तक सफर
लॉकडाउन के बाद आर्यन का रुझान पूरी तरह खेल की ओर हो गया। वह रोजाना 3 से 4 घंटे राजीव गांधी स्टेडियम में जेवलिन थ्रो का अभ्यास करने लगे। लगातार मेहनत का परिणाम रहा कि उन्होंने अब तक स्टेट लेवल पर दो मेडल जीते और स्पेशल ओलंपिक्स भारत की नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया। पार्थ भी शॉटपुट की प्रैक्टिस करते हैं। बोलने में असमर्थ होने के बावजूद खेल के मैदान में उनका प्रदर्शन उनकी आवाज बन गया है। नेशनल स्तर पर गोल्ड जीतना और पहुंचना अपने आप में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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वाक बाधिता के बावजूद शॉटपुट में संघर्ष
वहीं 2010 में जन्मे पार्थ वाक बाधिता से ग्रस्त हैं। बचपन में तेज बुखार सिर में चढ़ने के बाद यह स्थिति बनी। शुरुआती दौर में वे अत्यधिक हाइपर एक्टिव थे। अर्पण फुलवारी के बाद उन्हें सिरतार में दाखिला लिया जहां बीते 5-6 वर्षों से वे शॉटपुट का नियमित अभ्यास कर रहे हैं।
सबसे बड़ी लड़ाई समाज की सोच से
पार्थ के पिता जयंत शर्मा कहते हैं कि एक स्पेशल बच्चा नेशनल तक पहुंचे, यही बहुत बड़ी सफलता है। सबसे बड़ी समस्या समाज का स्वीकार न करना है। हमने भी शुरुआत में स्वीकार नहीं किया लेकिन मेरी पत्नी ने हिम्मत नहीं हारी। आज उसी हिम्मत का नतीजा सामने है। उन्होंने सरकार से स्पेशल कैटेगरी के बच्चों के लिए पेंशन और स्थायी सहारे की नीति बनाने की मांग की।
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आर्यन और पार्थ बच्चे हमारी असली ताकत हैं। इन्हें सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, भरोसे और स्वीकार की जरूरत होती है। अगर समाज और सिस्टम इन बच्चों को अपनाए तो यह खिलाड़ी देश के लिए और भी बड़ी उपलब्धियां पा सकते हैं।
- संजीव राठी, कोच, सितार रोहतक।
17-आर्यन लठवाला, जैवलिन थ्रो खिलाड़ी, सितार। संवाद
17-आर्यन लठवाला, जैवलिन थ्रो खिलाड़ी, सितार। संवाद