रेवाड़ी के सहारनवास में करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बना वेटनरी पॉलीक्लीनिक अभी तक शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय पंचायत और अस्पताल बनवाने के लिए प्रयास करने वाले पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव की मानें तो गांव की पांच एकड़ की जमीन पर बना यह पशु हॉस्पिटल ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ की भेंट चढ़ गया है। सीएम और स्थानीय विधायक से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अभी तक दो मंजिला बने इस अस्पताल को शुरू नहीं किया गया है। वह भी तब जबकि बिल्डिंग के बने डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। हालांकि इस बाबत ठेकेदार कहते हैं कि जल्द ही अस्पताल को टेकओवर कर लिया जाएगा। लेकिन इस बात की न तो पंचायत को खबर है और न ही सरकार में किसी ने इस बात की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रेवाड़ी के गांव सहारनवास में दक्षिण हरियाणा के सबसे बड़े वेटनरी पॉलीक्लीनिक की घोषणा की थी। इसका काम भी शुरू हो गया था।
रेवाड़ी समेत राज्य में अब तक पांच हैं ऐसे अस्पताल
पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव के प्रयासों के बाद रेवाड़ी में अक्टूबर 2013 में गांव सहारनवास में अस्पताल बनना शुरू हुआ। एक साल पांच महीने में दो मंजिला भवन बनकर तैयार हुआ। राज्य में रेवाड़ी के अलावा चार ही जिलों में इस तरह के बड़े पशु अस्पताल हैं। अन्य चार जिलों में हिसार, रोहतक, जींद और सिरसा हैं।
80 फीसदी किसान-पशुपालक, पूरे दक्षिण हरियाणा को लाभ
गांव सहारनवास निवासी अभिमन्यु राव बताते हैं कि जिले में 80 फीसदी किसान और पशुपालक हैं। पंचायत की पांच एकड़ जमीन देने का उद्देश्य सिर्फ रेवाड़ी ही नहीं बल्कि दक्षिण हरियाणा को इस अस्पताल से लाभ दिलवाना था। इसमें नारनौल, गुड़गांव, फरीदाबाद, मेवात, महेंद्रगढ़, नारनौल शामिल हैं। फिलहाल पशुपालकों को अपने दुर्घटनाग्रस्त और बीमार पशुओं को हिसार स्थित अस्पताल दिखाने के लिए ले जाना पड़ता है।
नहीं हुआ उद्घाटन
अस्पताल के उद्घाटन के लिए ग्राम पंचायत की ओर से सीएम और रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास को पत्र लिखा गया। गांव की सरपंच आयूषी राव कहती हैं कि इन डेढ़ सालों में पांच बार सीएम रेवाड़ी आए लेकिन अस्पताल का उद्घाटन नहीं कराया गया। पंचायत के सूत्रों और अस्पताल से जुड़े कुछ सूत्रों की मानें तो अगर हाल-फिलहाल में गांव स्तर पर ही उद्घाटन हुआ भी तो न यहां बैठाने के लिए स्टाफ की व्यवस्था है और पूरी मशीनरी की। जबकि यहां पशुओं से जुड़े रिसर्च, सीमेन बैंक, ऑपरेशन टेस्ट समेत सभी सुविधाएं होनी थीं।
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गांव की जमीन इसलिए दी थी कि कुछ लाभ मिले। इस बीच खुद उनकी गाय बीमार होकर मर चुकी है। अस्पताल होता तो यह नुकसान नहीं होता।
-कांता देवी, ग्रामीण
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सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है। लेकिन हकीकत में सरकार को किसानों और पशुपालकों के हितों की चिंता नहीं है।
-यशपाल, किसान
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ग्रामीणों ने मुफ्त दी जमीन, नहीं मिल रहा कोई लाभ
ग्रामीणों ने अपनी पंचायत की जमीन इस लिहाज से दी थी कि उनके गांव के साथ ही रेवाड़ी और आसपास के दक्षिण हरियाणा का भला हो। लेकिन डेढ़ साल से यहां कुछ नहीं हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों की मुफ्त में दी गई करोड़ों की जमीन का कोई लाभ नहीं रहा।
-आयूषी राव, सरपंच, गांव सहारनवास
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अथक प्रयासों के बाद दक्षिण हरियाणा का सबसे बड़ा पशु अस्पताल तैयार कराया था। लेकिन उनका गांव और सरकार बदलने के चलते डर्टी पॉलिटिक्स का खामियाजा अहीरवाल और आसपास का क्षेत्र उठा रहा है। सरकार के पास न स्टाफ है, न इक्वीपमेंट और न ही रोजगार।
-कैप्टन अजय यादव, पूर्व मंत्री, हरियाणा सरकार
वर्जन
पॉलीक्लीनिक संबंधी फर्नीचर बिलं्िडग में आ चुके हैं। इक्यूपमेंट्स और मशीनरी आनी बाकी है। शीघ्र ही बिल्डिंग को टेक ओवर कर लिया जाएगा।
डॉ. राजेश कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग, रेवाड़ी।