रेवाड़ी। शहर के डबल फाटक पर अंडरपास का निर्माण कार्य श्रमिकों के अभाव में अटका हुआ है। एक जून को पीडब्ल्यूडी ठेकेदार ने बिहार से श्रमिक बुलाए। इसके बाद किसी ने उन्हें ज्यादा दहाड़ी का ऑफर दिया तो बीच में ही काम छोड़कर चलते बने। ऐसे में एक बार फिर से काम अटका हुुआ है।
बता दें कि रेलवे की ओर से 6 रेलवे लाइन के बीच अंडरपास निर्माण का कार्य पूरा किया जा चुका है। फाटक के दोनों ओर अतिक्रमण हटाकर सड़क आदि का निर्माण पीडब्ल्यूडी की ओर से किया जाना है। काम फरवरी में शुुुरू होना था, लेकिन बाद में लॉकडाउन लग गया और काम शुरू नहीं हो सका। लॉकडाउन खत्म हुआ तो एक जून से काम शुरू कराने के लिए बिहार से श्रमिक लाए गए। काम शुरू जरूर हुआ, लेकिन श्रमिक चलते बने।
निर्माण में देरी से 10 हजार की आबादी को परेशानी
शहर के डबल फाटक पार 10 से अधिक कॉलोनियों में 10 हजार से अधिक लोग रहते हैं। इनमें विकास नगर, कंकरवाली, रेलवे कॉलोनी, गुलाबी बाग, आदर्श नगर, यादव नगर, दुर्गा कॉलोनी, इंद्राकॉलोनी सहित अन्य मोहल्ले शामिल हैं। करीब डेढ़ साल से डबल फाटक पूरी तरह से बंद हैं, ऐसे में लोगों को पांच किमी. का चक्कर काटकर शहर में आना पड़ता है। ऐसे में जरूरी कि कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।
भारत का इकलौता लोको शेड, जाने का नहीं रास्ता
डबल फाटक पार स्थित भारत में एकमात्र जीवित भाप लोको शेड है। इतना ही नहीं भारत के कुछ अंतिम जीवित स्टीम लोकोमोटिव भी यहां मौजूद हैं। दुनिया की सबसे पुरानी 1855 में निर्मित स्टीम लोकोमोटिव फेयरी क्वीन (लोकोमोटिव) अभी भी पर्यटकों को सवारी करा रहा है। इतना ही आजादी का प्रतीक आजाद जैसे लोकोमोटिव वर्किंग कंडीशन में हैं। इस हैरिटेज लोकोशेड को देखने के लिए विदेशों तक से लोग आते हैं, लेकिन यहां तक जाने के लिए कोई बेहतर रास्ता नहीं होने के चलते इसकी चमक फीकी है। यदि अंडरपास का निर्माण जल्द पूरा हो जाए तो यहां पर पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं।
वर्जन
एक जून से काम शुरू कराया गया था, लेकिन श्रमिक बीच में ही छोड़कर चले गए थे। अब दोबारा श्रमिक बुलाकर काम शुरू करा दिया गया है।
आदित्य देशवाल, एसडीओ पीडब्ल्यूडी