रोहतक रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। हुडा के उच्च अधिकारियों ने इसके लिए स्थानीय अधिकारियों और जिला नगर योजनाकार से रिपोर्ट मांगी है। ट्रांसपोर्ट नगर करीब 296.131 एकड़ में होगा। जिसमें ट्रांसपोर्टेशन से संबंधित सभी सुविधाओं के साथ होटल, ढाबे, दुकानें, पुलिस चौकी, अस्पताल तक की सुविधाएं होंगी। ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर-31 में रहेगा।
भिवानी में जरूरत को देखकर हुडा ने ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का प्लान तैयार किया था। इसके लिए रोहतक रोड पर केंद्रीय विद्यालय से आगे की जगह का चयन किया गया। मगर, शुरूआत में ही जमीन विवाद में घिर गई। केंद्रीय विद्यालय से थोड़ा आगे कॉलोनी बस गई और खासी संख्या में लोग रहने लगे। बिजली मीटर समेत सभी तरह की सुविधाएं भी विभागों से ले ली। इस कारण मामला लटक गया।
आखिरकार कॉलोनी का हिस्सा छोड़कर 296.131 एकड़ में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का लेआउट प्लान जिला नगर योजनाकार विभाग ने वर्ष 2013 में भेजा। तब से अब तक प्लान को मंजूरी का इंतजार है। अब सरकार बदलने के बाद हुडा अधिकारी भी इसके प्रति गंभीर नजर आ रहे हैं और स्थानीय हुडा अधिकारियों, जिला नगर योजनाकार से इसकी स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है। 296.131 एकड़ जगह में केंद्रीय विद्यालय से निनान गांव तक की जमीन के अलावा आसपास के एक-दो अन्य गांवों की भी कुछ जमीन शामिल हैं।
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कॉलोनी के लिए छोड़ी करीब 64 एकड़ जमीन
हुन्नामल प्याऊ के ठीक सामने सड़क पार लोगों ने जमीनें खरीदकर मकान बना लिए। फिलहाल यहां भारी संख्या में मकान बने हैं। स्थानीय लोगों ने इसे डिफेंस कॉलोनी का नाम दिया है। आबादी क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की अनिवार्यता के चलते यहां बिजली-पानी और सीवर कनेक्शन भी है। आबाद क्षेत्र को देखकर हुडा को ट्रांसपोर्ट नगर की 360 एकड़ जमीन में से करीब 64 एकड़ जमीन छोड़नी पड़ी।
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हर तरह की होंगी सुविधाएं
ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रांसपोर्ट अलावा अन्य सभी जरूरत की सुविधाएं भी होंगी। जिनमें यहां दुकानें भी रहेंगी और होटल, ढाबे भी। अस्पताल भी होगा तो पुलिस चौकी का भी प्रावधान है। पार्क की भी सुविधाएं होंगी। इसका कच्चा खाका तैयार है और मंजूरी के बाद ही इसे फाइनल माना जाएगा। इसका लेआउट बनाकर मंजूरी के लिए भेजा हुआ है।
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वर्जन:::
रोहतक रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जाना है। जिसका लेआउट जिला नगर योजनाकार विभाग ने मंजूरी के लिए भेजा हुआ है। जमीन संबंधित विवाद निपट चुके हैं। उच्च अधिकारियों ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। लेआउट को मंजूरी मिलने के बाद ही काम शुरू होगा।
नरेश शर्मा, एसडीओ, हुडा विभाग