रेवाड़ी। कृषि विभाग की ओर से उर्वरक बिक्री प्रणाली पर आयोजित कार्यक्रम में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप कृषि निदेशक डॉ. जितेंद्र अहलावत ने की।
अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के माध्यम से डीएपी और यूरिया जैसे प्रमुख उर्वरकों की बिक्री पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा सकेगी। इससे खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगेगा। किसानों को निर्धारित मात्रा में समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना संभव होगा।
डॉ. जितेंद्र अहलावत ने कहा कि आधुनिक कृषि में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सहकारी बैंक और पीएसीएस कर्मचारियों से डिजिटल प्रणाली को पूरी गंभीरता से अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि उर्वरक बिक्री का डिजिटलीकरण केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे रिकॉर्ड प्रबंधन आसान होगा और भविष्य की कृषि नीतियों के निर्माण में भी मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिनिधियों ने तकनीकी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की। अधिकारियों ने आगामी बुवाई सीजन को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना भी साझा की।