धारूहेड़ा। औद्योगिक कस्बा धारूहेड़ा में ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई गई है। भारी वाहनों की नो इंट्री लागू नहीं होने और पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण भगत सिंह चौक समेत प्रमुख चौराहों पर आए दिन जाम लगता है। जाम में फंसे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
तीन वर्ष पूर्व नगर पालिका प्रशासन की ओर से 18 से 20 लाख रुपये की लागत से कैमरे और सिग्नल लाइटें लगाई गई थीं। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी लेकिन स्थिति जस की तस बनी है।
कई स्थानों पर सिग्नल लाइटें कभी जलती हैं तो कभी बंद रहती हैं। कभी-कभी वे डीजे लाइट की तरह टिमटिमाती नजर आती हैं। ऐसे में वाहन चालक सिग्नल का पालन करने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
कस्बे के मुख्य बाजारों, बैंकिंग क्षेत्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। लोग अपने वाहन सड़क किनारे कहीं भी खड़ा कर चले जाते हैं जिससे आवागमन बाधित होता है।
ऑटो चालक भी जहां-तहां ऑटोरिक्शा लगा देते हैं जिससे जाम लग जाता है। सवारियां उतारने और बैठाने के लिए ऑटो चालक सड़क के बीच ऑटो रोक देते हैं जिससे पीछे लंबी कतारें लग जाती हैं।
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शहर में भारी वाहनों के घुसने से लगता है जाम
धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। इसके आसपास भिवाड़ी, बावल, मानेसर और पथरेड़ी जैसे औद्योगिक इलाके स्थित हैं। इन क्षेत्रों से भारी मालवाहक ट्रक शहर के अंदर से होकर गुजरते हैं। शहर में बड़े वाहनों के लिए नो-एंट्री लागू नहीं होने से जाम की समस्या और बढ़ जाती है। संकरी सड़कों पर ट्रकों के गुजरने से यातायात ठप हो जाता है।
वर्जन
ट्रैफिक लाइट लगाने के बाद पुलिस अधिकारियों से बातचीत की गई थी। पुलिस को चार्ज देने की पेशकश की गई थी लेकिन पुलिस प्रशासन ने चार्ज लेने से मना कर दिया। ट्रैफिक व्यवस्था और चालान करना पुलिस का दायित्व है, नगर पालिका का नहीं।-कंवर सिंह, चेयरमैन, नगर पालिका धारूहेड़ा।
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भगत सिंह चौक पर लगी ट्रैफिक लाइट बंद करवाई गई है। लाइट बंद होने के बाद जाम की स्थिति में कुछ कमी आई है। दुकानदारों की ओर से दुकानों के आगे रेहड़ी लगाना भी जाम का कारण है। ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर जाम खुलवाने के लिए कार्रवाई करती है।-सुरेश कुमार, ट्रैफिक इंचार्ज, धारूहेड़ा।