संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। वेस्टर्न डेडिकेटिड रेल फ्रेट कॉरिडोर पर बनाया गया 111.5 मीटर लंबा स्टील ओवरब्रिज का एक हिस्सा इस वर्ष खोलने से लोगों को काफी राहत मिली है। यातायात के लिए बाईपास का हिस्सा 1 दिसंबर को खोल दिया गया था। इससे शहर के बाहर से तीन नेशनल हाईवे की सीधी कनेक्टिविटी हो गई है। इससे शहर में ट्रैफिक का दबाव 40 फीसदी कम हुआ है। इससे दिल्ली से नारनौल और महेंद्रगढ़ के बीच भारी वाहनों का सफर 8 किलोमीटर तक कम हो गया है।
यह ओवरब्रिज एशिया के प्रमुख स्टील ओवरब्रिज में से एक है। तत्कालीन सीएम मनोहर लाल ने नारनौल रोड से दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे को जोड़ने के लिए आउटर बाईपास के निर्माण की घोषणा 2015 में की थी। सड़क निर्माण के लिए 2018 में नारनौल रोड से नेशनल हाईवे तक 18 गांवों के 1274 किसानों की जमीन का अधिग्रहित की गई थी। 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले आउटर बाईपास रोड का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इस बाईपास पर 111.5 मीटर लंबाई का फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज बन रहा है। यह ओवरब्रिज देश का दूसरा सबसे लंबा व सबसे वजनदार आरओबी है, जो दो-दो पिलरों पर टिका हुआ है। इसे स्पॉटलैस आरओबी कहा जाता है। आरओबी का निर्माणकार्य एचजी इंफ्रा करा रही है। दो लेन के एक हिस्से को कंपनी ने एनएचएआई को करीब तीन माह पहले ही हैंडओवर कर दिया था, जबकि दूसरा हिस्सा बनने के बाद कभी भी हैंडओवर किया जा सकता है। अगले वर्ष दूसरा हिस्सा भी तैयार हो जाएगा।
सर्कुलर रोड पर ट्रैफिक दबाव हुआ कम
आउटर बाईपास का निर्माण नारनौल और महेंद्रगढ़ से दिल्ली व जयपुर की ओर आवागमन करने वाले भारी वाहनों के लिए कराया गया है। इससे यह वाहन शहर में प्रवेश करने की बजाय बाहर से अब निकलते हैं। भारी वाहनों को पहले शहर के सर्कुलर रोड से ही निकलना पड़ रहा था, जिस कारण दिनभर सरकुलर रोड पर वाहनों का दबाव रहता था। हालांकि, अब इन सभी समस्याओं से मुक्ति मिल गई है।
वर्जन
आउटर बाईपास का एक हिस्सा 1 दिसंबर को यातायात के लिए खोल दिया गया था। दूसरा हिस्से को खोलने के लिए भी तेजी से कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि अगले साल तक दूसरा हिस्सा भी खुल जाएगा।-योगेश, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई।