धारूहेड़ा। हर घर तिरंगा अभियान के बीच धारूहेड़ा खंड के कई गांवों में राष्ट्रीय ध्वज की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जिन बंडलों में करीब 100 झंडे होने चाहिए, उन्हें खोलने पर कई बंडलों में संख्या पूरी नहीं मिल रही। कुछ बंडलों में 90, कुछ में 91 तो कुछ में 92 झंडे ही पाए गए हैं। इससे वितरण व्यवस्था और झंडों की गिनती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रत्येक झंडे के लिए 25 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, झंडे के साथ दी जाने वाली डंडी की व्यवस्था राशन डिपो धारकों द्वारा अपने स्तर पर किए जाने की बात सामने आई है।
मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेने पर बताया गया कि ये झंडे गुजरात की एक कंपनी से भेजे गए हैं। हालांकि, ग्रामीणों का सवाल है कि यदि झंडों की आपूर्ति निर्धारित मानकों के अनुसार हुई है तो फिर कई स्थानों पर कटे-फटे झंडे और बंडलों में कम संख्या कैसे पहुंच रही है।
खरखड़ा के राजेश, अनिल, नरेश, बीरेंद्र का आरोप है कि राशन डिपो के माध्यम से पैसे लेकर वितरित किए जा रहे तिरंगे कई जगह कटे-फटे और बेहद खराब गुणवत्ता के हैं।
ग्रामीणों के अनुसार डिपो से मिलने वाले कई झंडे पहली नजर में ही खराब स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय ध्वज जैसे सम्मान के प्रतीक की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
जिले के लिए 13 हजार तिरंगों का कोटा
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय के निर्देशों के अनुसार इस वर्ष रेवाड़ी जिले के लिए 13 हजार राष्ट्रीय ध्वजों की मांग निर्धारित की गई है। इन झंडों को डाक विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराया जाना है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, खराब और कटे-फटे झंडों को तुरंत वापस लेकर गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय ध्वज उपलब्ध कराए जाएं तथा बंडलों में निर्धारित संख्या से कम झंडे मिलने की भी जांच की जाए।