रेवाड़ी। ग्रामीण निवासियों को राहत प्रदान करने और नियोजित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने गांवों में अनाधिकृत निर्माणों के नियमितीकरण के लिए नीति शुरू की है। नियमितीकरण प्रक्रिया की अंतिम तिथि 16 जनवरी है।
डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब ग्राम पंचायतों को राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से गैर कृषि योग्य शामलात देह भूमि को उन ग्रामीणों को बिक्री के माध्यम से हस्तांतरित करने का अधिकार देता है जिन्होंने 31 मार्च, 2004 को या उससे पहले मकान बनाए हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसा नियमितीकरण निर्मित क्षेत्रफल के 25 प्रतिशत तक के मकानों और संबंधित खुले स्थानों पर लागू होगा जो 500 वर्ग गज से अधिक नहीं होना चाहिए। भूमि यातायात या सार्वजनिक उपयोगिताओं में बाधा नहीं डालनी चाहिए या तालाबों, जल निकायों या रास्तों व फिरनी के लिए आरक्षित नहीं होनी चाहिए। बिक्री बाजार दर से कम दर पर नहीं की जाएगी जिसका निर्धारण एक निर्धारित तरीके से किया जाएगा और इस निर्धारण के नियमों को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाएगा।