इंडियन स्कोप ऑउल, भारतीय ईगल और ओरिएंटल स्कॉप्स
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रेवाड़ी के अरावली क्षेत्र में इन दिनों उल्लुओं की तीन नई दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिल रही हैं। इनमें एक प्रजाति का ऐसा है जो दूसरे देश से उड़ान भरकर जनवरी व फरवरी में आता है और सिर्फ एक बार दिखाई देता है। इसके अलावा दो अन्य प्रजाति भारतीय हैं जो इस क्षेत्र में दिखाई देने लगी हैं। इनमें भारतीय स्कूप्स उल्लू, भारतीय ईगल उल्लू व ओरिएंटल स्कूप उल्लू हैं।
वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ राकेश अहलावत ने बताया कि नई प्रजाति के उल्लुओं को देखने के लिए देश-विदेश से वाइल्ड लाइफ प्रेमी अरावली की पहाड़ियों पर भ्रमण करने आते हैं। अरावली क्षेत्र के आसपास बसे पाड़ला, बासदूधा, अहरोद, मनेठी, खोल, भालखी, नांधा, बलवाड़ी, माजरा व खालेटा आदि गांव अरावली की पहाड़ियों पर बने जंगल से जुड़े हैं। इन दस गांवों में बेहद सघन जंगल हैं जहां की आबोहवा जीव-जंतुओं के लिए बेहतरीन है। इन घने जंगलों में पक्षियों की 300 से ज्यादा प्रजातियां देखने को मिलती हैं, जो पहले कभी यहां नजर नहीं आई थीं। इन दिनों अगर पक्षी प्रेमी आएंगे तो उन्हें उल्लुओं की नई तीन प्रजातियां देखने को मिलेंगी।
इंडियन स्कोप ऑउल
इंडियन स्कोप ऑउल की लंबाई 25 सेमी तक होती है। जूलोजिकल भाषा में इसे ऑटसबाका मोईना के नाम से पहचाना जाता है। इस पक्षी के चेहरे पर गहरी भूरी लाइन होती है, जिससे इसकी पहचान सामान्य उल्लू से अलग नजर आती है। इस प्रजाति के पक्षी की छाती पर हल्की खड़ी धारियां होती हैं। आंखें गहरी नारंगी या भूरी होती हैं। अलग-अलग जगह पर प्रवास काल के दौरान भौगोलिक परिवेश व वातावरण के अनुसार यह पक्षी अपना रंग बदलता रहता है। कश्मीर से लेकर श्रीलंका तक आमतौर पर देखे जाने वाला यह पक्षी पड़ोसी देश पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश में नजर नहीं आता। यह अरावली की पहाड़ियों में देखा जा सकता है।
भारतीय ईगल उल्लू
बंगाल ईगल-उल्लू (बुबो बंगालेंसिस), जिसे व्यापक रूप से भारतीय ईगल-उल्लू या रॉक ईगल-उल्लू के रूप में भी जाना जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप में पहाड़ी और चट्टानी झाड़ीदार जंगलों में पाई जाने वाली एक बड़ी सींग वाली उल्लू प्रजाति है। यह भूरे और भूरे रंग का होता है, और इसके गले पर एक सफेद धब्बा होता है जिस पर काली छोटी धारियां होती हैं। इसे पहले यूरेशियन ईगल-उल्लू की उप-प्रजाति माना जाता था। यह आमतौर पर जोड़े में देखा जाता है। इसकी गहरी गूंजती हुई गड़गड़ाहट वाली आवाज होती है जिसे सुबह और शाम को सुना जा सकता है।
ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू
ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू दक्षिण एशिया में पाए जाने वाले स्कॉप्स उल्लू की एक प्रजाति है। वे शुष्क पर्णपाती जंगलों में पाए जाते हैं। इनमें प्रमुख सफेद स्कैपुलर धब्बे, धारीदार निचले हिस्से और ऊपरी हिस्से होते हैं, इनमें प्रमुख न्युकल कॉलर नहीं होता है। रूफस मॉर्फ यूरेशियन स्कॉप्स-उल्लू से अलग है, लेकिन अन्य लगभग समान दिखते हैं, हालांकि ओरिएंटल स्कॉप्स-उल्लू ऊपर और नीचे अधिक भारी रूप से चिह्नित होते हैं। यह अब अरावली की पहाड़ियों में भी दिखाई दे रहा है। खासतौर पर यह उल्लू जनवरी व फरवरी माह में ही प्रवास करता है।