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तीन घंटे मीटिंग के बाद विवाद खत्म

Sat, 08 Mar 2014 12:32 AM IST
कोसली (रेवाड़ी)
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कोसली-भाकली नामकरण विवाद पर तीन घंटे तक बंद कमरे में चली मीटिंग के बाद विराम लग गया। पिछले तीन दिन से मृतक महाबीर के शव को लेकर धरने पर बैठे कोसली लोगों ने शुक्रवार दोपहर शव को धरना स्थल से उठा लिया और दाह संस्कार किया।
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इस प्रकरण के समाप्त होने के बाद प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। गुरूवार शाम कोसली के ग्रामीणाें ने एक संघर्ष कमेटी बनाकर शुक्रवार शाम को प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था। जिसके बाद प्रशासान की सांसे फूल गई थी। ग्रामीणाें के अल्टीमेटम पर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार सुबह ही मुख्य संसदीय सचिव राव दानसिंह को किसी भी तरह से मामले को सुलझाने के लिए दूत के रूप में कोसली भेजा।

जिसके बाद राव दान सिंह के अध्यक्षता में कमेटी के लोगों के साथ करीब तीन घंटे बैठक हुई। बैठक में कमेटी के मांगों को मान लिया गया। जिसके बाद से धरने पर बैठे लोगों ने शव का दाह संस्कार किया।
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ये रही प्रमुख मांग
आरओबी का नाम मृतक महाबीर के नाम पर करने, मृतक के परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी देने, मृतक को शहीद का दर्जा देने, किसान भवन का नाम कोसली के नाम पर करने

आचार संहिता के बाद होगा पालन
सरकार की ओर से आए मुख्य संसदीय सचिव राव दानसिंह ने कहा कि जब तक आचार संहिता लागू है, तब तक मृतक के परिवार से एक व्यक्ति को डीसी रेट पर नौकरी दी जाएगी। आचार संहिता हटने के बाद उसकी योग्यता के आधार पर स्थाई नौकरी दे दी जाएगी।

प्रदेश के अन्य शहीदाें के बराबर आर्थिक सहायता व शहीद का दर्जा दिया जाएगा। आरओबी का नाम शहीद के नाम पर ही होगा, लेकिन किसान भवन का नाम दोनों गांवो में से किसी का भी न होकर केवल किसान भवन ही रहेगा। इसके अलावा जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज है, उस पर पुलिस अविलंब कारवाई करेगी।
 
भाई से भाई की लड़ाई में मिला शहीद का दर्जा
पहले जहां देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते थे, उन्हें ही शहीद का दर्जा दिया जाता था। लेकिन आज प्रशासन व सरकार को एक गांव के लोगों के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए एक भाई के साथ भाई की लड़ाई में मारे गऐ वृद्ध को ही शहीद का दर्जा देना पड़ा। क्या सरकार ऐसा करके सरहद पर शहीद होने वालों का अपमान नहीं किया है? 
 
चार पूड़ी खा काटी रात
कोसली विवाद को लेकर पिछले तीन दिन से तैनात पुलिस कर्मचारियों को मात्र चार पूरी व चाय के सहारे ही दिन रात गुजारना पड़ा। जैसे ही फैसला होने की सूचना पुलिस को मिली। उन्होंने राहत की सांस ली।
 
भाकली के लोग भी आए सड़क पर
शुक्रवार को भाकली के लोग भी उस समय सड़क पर आ गए, जब गांव के 85 वर्षीय महिला गिंदौड़ी देवी का देहांत हो गया। गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि गिंदौड़ी देवी की मौत पांच मार्च को हुए पथराव में घायल होने के कारण हुई है। उनकी मांग है कि गिंदौड़ी देवी को शहीद का दर्जा दिया जाए तथा गांव कोसली के लोगों पर भी हत्या का मामला दर्ज किया जाए।

गांव भाकली के हजारों की संख्या में महिला-पुरूष हुडा ग्राउंड पर धरने पर बैठे हुए हैं। गांव के ग्रामीण छाजूराम, मोहर सिंह, शीशपाल आदि का कहना है कि वह प्रशासन व सरकार द्वारा कोसली गांव के लोगाें द्वारा रखी गई मांगों को स्वीकार करने की बात से कतई सहमत नहीं हैं। जो सरकारी भवन भाकली की सीमा में बने हैं, उन पर भाकली का ही नाम होगा।

शुक्रवार को भी नहीं खुले बैंक व बाजार
पिछले तीन दिन से कोसली में न तो बाजार खुला और ना ही कोई बैंक। जिस कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

हालांकि शुक्रवार दोपहर कोसली के लोगों द्वारा धरना समाप्त करने की सूचना मिलने के बाद कुछ व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोली, लेकिन जैसे ही भाकली गांव के लोगों के धरना देने की बात बाजार में पहुंची तो सभी ने अपनी दुकानें बंद कर दी।
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