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कोसली-भाकली विवाद: 32 घंटे बीते, नहीं निकला कोई हल

Fri, 07 Mar 2014 12:18 AM IST
कोसली (रेवाड़ी)
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कोसली- भाकली नामकरण मामले को लेकर पांच मार्च को हुए खूनी संघर्ष को 32 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासन नहीं सुलझा पाया है। कोसली के ग्रामीण बस स्टैंड पर एकत्र हुए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उधर, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर धारा 144 लगा दी है।
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आज सुबह कोसली के लोग गांव में स्थित पंचायत घर में इकट्ठे हुए। इसके बाद वह सब लोग कोसली के बस स्टैंड पर पहुंचे तथा वहां सड़क के बीचों बीच बैठ गए तथा सरकार व प्रशासन विरोधी नारे लगाने लगे। इस बीच सूचना आई कि बुधवार को भाकली-कोसली के ग्रामीणाें के बीच हुए खूनी के संघर्ष के दौरान मारे गए महाबीर का शव प्रशासन तब तक नहीं देगा जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता।

इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अहतियात के तौर पर धारा 144 लगाने के अलावा कोसली गांव व शहर को पुलिस छावनी में बदल दिया है। इस बीच शांतिपूर्वक धरने पर बैठे लोगों के बीच कुछ सादी वर्दी में कुछ पुलिसकर्मी पहुंचे, जिस पर लोगों का गुस्सा भड़क गया और लोगों ने उनकी धुनाई कर डाली।
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इससे एक बार फिर मामला गर्मा गया, लेकिन गांव के प्रबुद्ध लोगों ने तत्परता दिखाते हुए शांति बनाए रखने की अपील की, जिसे सभी ने मान लिया।

चार दौर की बातचीत में भी नहीं सुलझा मामला
कोसली में धरने पर बैठे लोगों द्वारा बनाई गई संघर्ष समिति के साथ जिला उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक ने थाने में चार बार बैठक की और मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन जैसा ग्रामीण चाहते हैं वैसा प्रशासन करने को तैयार नहीं है। जिससे मामले को सुलझाने के लिए बात आगे नहीं बढ़ सकी। जिसके बाद ग्रामीणों ने विचार रखा कि सड़क मार्ग जाम करने के अलावा रेल लाइन पर भी धरना दिया जाएगा, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी।


आर-पार की लड़ाई का किया ऐलान
बृहस्पतिवार को जैसे ही मृतक महाबीर का शव एंबुलेंस लेकर धरना स्थल पर पहुंची तो लोगों में भारी रोष पनप गया तथा आर-पार की लड़ाई करने का ऐलान किया गया, लेकिन फिर प्रबुद्ध लोगों ने मामले को संभाल लिया। वहीं युवाआें ने सरकारी होर्डिगों को एकत्र कर कोसली-रेवाड़ी व झज्जर मार्ग पर आग लगा दी।

आग की सूचना पाकर प्रशासन भी सचेत हो गया तथा ग्रामीणाें को एक बार पुन: बातचीत के लिए बुलाया। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने ग्रामीणाें के सामने मृतक के आश्रितों को चार लाख रुपये व सरकारी नौकरी देने की बात रखी, लेकिन बातचीत के लिए गए लोगों ने इसे अस्वीकार कर दिया और मामला सुलझने के बजाए उलझ गया।

इसके बाद धरना स्थल पर बैठे लोगों ने प्रशासन को पुन: सचेत किया कि उनकी मांग के अनुसार हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। लेकिन पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पहले धरना खत्म करो, जिस पर ग्रामीण फिर से भड़क गए। इस दौरान करीब तीन-चार सौ महिला- पुरुष थाने तक जा पहुंचे। बहरहाल मामले को लेकर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है।

कोई निर्णय न होने के कारण कोसली के ग्रामीण मृतक के शव को कोसली-रेवाड़ी व कोसली-झज्जर मार्ग पर रख कर धरने बैठे हुए हैं। वहीं पुलिस प्रशासन भी धरना स्थल पर बैठे लोगों को तीन तरफ से घेर कर नजर रखे हुए है। उधर, ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि शुक्रवार शाम चार बजे तक यदि मांगाें पर गौर नहीं किया गया तो आर-पार की लड़ाई होगी।

भाकली में भी हुई पंचायत
भाकली के 17 ग्रामीणों के खिलाफ पुलिस द्वारा नामजद केस दर्ज किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को गांव के मंदिर में पंचायत हुई। पंचायत में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए पुलिस से रिटायर थानेदार शीशपाल ने बताया कि नामजद किसी भी ग्रामीण को गिरफ्तार नहीं करने दिया जाएगा।

गौरतलब है कि पुलिस ने बुधवार को कोसली में हुए बवाल के बाद एक व्यक्ति की मौत होने तथा कई लोगों के घायल होने के मामले में भाकली के 17 ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

कोसली के ग्रामीणाें की ये हैं मांगें
- मृतक के परिवार को सरकार की ओर से 50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
- मृतक के परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी।
- घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को दो-दो लाख रुपये दिए जाएं।
- मृतक महाबीर को शहीद का दर्जा दिया जाए।
- ओवर ब्रिज का नाम शहीद महाबीर के नाम पर रखा जाए।
- किसान भवन का नामकरण कोसली के नाम पर किया जाए।

अभी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मामले को सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पूरे मामले पर नजर रखने के लिए दो दिन से कोसली में ही डेरा डाला हुआ है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
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-पंकज नैन, पुलिस अधीक्षक, रेवाड़ी।
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